कब तक ढह जाएगा ईरान का शासन? युद्ध शुरू होने से पहले ही Mossad चीफ ने कर दी थी ये भविष्यवाणी
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 25 दिनों से जारी युद्ध के बावजूद ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ है। मोसाद ...और पढ़ें

ईरान के शासन को ढहाने की प्लानिंग कर रहे अमेरिका-इजरायल (फोटो-रॉयटर्स)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते हुए 25 दिन हो गए हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट में संघर्ष अभी भी जारी है।
अमेरिका और इजरायल इस युद्ध के अंत के साथ ही ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश में लगे हैं, लेकिन युद्ध के 25 दिन बाद भी ईरान में ऐसी स्थिति बनती नजर नहीं आ रही है।
कब ढहेगा ईरान का शासन?
इजरायल की इंटेलीजेंसी एजेंसी मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया ने ईरान के साथ युद्ध से पहले इजरायल की कैबिनेट को बताया था कि तेहरान में सत्ता परिवर्तन संभव है, लेकिन इसमें कुछ दिन या हफ्ते नहीं, बल्कि लगभग एक साल से ज्यादा का समय लग सकता है।
द यरूशलेम पोस्ट के अनुसार, बार्निया ने युद्ध शुरू होने से एक दिन पहले इजरायली नेताओं के सामने कई संभावनाएं बताई थीं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बार्निया के इस आकलन को हाल के कुछ गुमनाम हमलों ने धुंधला कर दिया है, जिनमें उन पर ईरानी शासन के तेजी से गिरने की संभावनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया गया था।
मोसाद चीफ की भविष्यवाणी
द यरूशलेम पोस्ट के अनुसार, मोसाद चीफ ने सत्ता परिवर्तन को एक अनिवार्य घटना के रूप में पेश नहीं किया, बल्कि इसे कई शर्तों पर निर्भर एक संभावना के रूप में बताया था, जिसमें काफी समय लगने की उम्मीद थी।
डेविड बार्निया प्रमुख खुफिया आकलनों के साथ कुछ शर्तें जोड़ने के लिए जाने जाते हैं, और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी अधिकारियों के सामने पेश की गई कोई भी योजना बहुत ही नियंत्रित और व्यापक सरकारी रणनीति के दायरे में तय करते हैं।
बर्निया को थी ईरान में विद्रोह की उम्मीद
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बार्निया ने जनवरी के मध्य में नेतन्याहू और ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को बताया था कि युद्ध शुरू होने के कुछ ही दिनों के भीतर मोसाद ईरानी विपक्ष को एकजुट करने में मदद कर सकता है, जिससे ईरान में दंगे और विद्रोह की घटनाएं भड़क सकती हैं और यहां तक कि सरकार गिर भी सकती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि युद्ध के तीन हफ्ते बीत जाने के बाद भी ऐसा कोई विद्रोह नहीं हुआ और अमेरिका-इजरायल के खुफिया आकलनों का निष्कर्ष था कि ईरानी शासन कमजोर तो हुआ है, लेकिन अभी भी कायम है।
