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'नहीं दे सकते सपोर्ट', अमेरिकियों को मिडिल ईस्ट से बाहर निकालने में US को करना पड़ रहा स्ट्रगल

Published: Wed, 04 Mar 2026 01:11 PM (IST)

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी नेताओं पर सैन्य हमलों की पुष्टि की, जिसके बाद इजरायल ने भी एक ईरानी कंपाउंड पर हमला किया।

मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव से अमेरिकियों को निकालने में परेशानी।

मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव से अमेरिकियों को निकालने में परेशानी।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि हाल ही में मिलिट्री हमलों में ईरानी नेताओं के एक और ग्रुप को निशाना बनाया गया है। इजरायल ने ईरान के अगले सुप्रीम लीडर को चुनने वाली बॉडी से जुड़े एक कंपाउंड पर हमला किया। हालांकि, ईरानी स्टेट मीडिया ने बताया कि हमले से पहले बिल्डिंग को खाली करा लिया गया था।

बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बाद यूएस ने तीन देशों में अपनी एम्बेसी बंद कर दी हैं, मिडिल ईस्ट में अपने डिप्लोमैटिक स्टाफ को कम कर दिया है और अमेरिकी नागरिकों से इस इलाके को छोड़ने की अपील की है।

1500 लोगों ने मांगी मदद

यूएई ने पड़ोसी देशों के साथ सेफ एयर कॉरिडोर खोलने की घोषणा की है ताकि फंसे हुए नागरिकों को निकालने में आसानी हो, क्योंकि देश फंसे हुए नागरिकों को दूसरी जगह भेजने का काम कर रहे हैं। यूएस उन अमेरिकियों की मदद कर रहा है जो इस इलाके से निकलना चाहते हैं। इनमें 1,500 से ज्यादा लोग शामिल हैं जिन्होंने मदद मांगी है।

अमेरिकियों के पास कम विकल्प

इजरायल में अमेरिकियों के पास खास तौर पर कम ऑप्शन हैं। इजरायल में यूएस एम्बेसडर माइक हकाबी ने चेतावनी दी है कि एम्बेसी जमीन पर इवैक्युएशन सपोर्ट नहीं दे सकती। प्रेसिडेंट ट्रंप ने माना कि हमलों से पहले मिडिल ईस्ट में अमेरिकियों के लिए कोई फॉर्मल इवैक्युएशन प्लान नहीं था, जिससे चल रहे मिलिट्री ऑपरेशन के बीच नागरिकों को ले जाने में आने वाली लॉजिस्टिक चुनौतियों पर रोशनी पड़ी।

बदलते हालात इस इलाके में बढ़ती अस्थिरता और यूएस, इजरायल और ईरान के बीच दुश्मनी बढ़ने से विदेशी नागरिकों के सामने आने वाले खतरों को दिखाते हैं।

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