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क्या यह ट्रंप का होर्मुज प्लान है? अर्थशास्त्री ने चेतावनी दी- 'भारत निशाने पर हो सकता है'

Published: Wed, 04 Mar 2026 12:33 PM (IST)

होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों का रुकना युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर रहा है, जिसे कुछ विश्लेषक अमेरिका की भू-राजनीतिक रणनीति का पहला कदम मानते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप। (फाइल फोटो)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप। (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों का अचानक रुकना युद्ध के समय की रुकावट जैसा लग सकता है, लेकिन कुछ एनालिस्ट का मानना है कि यह अमेरिका का जियोपॉलिटिकल स्ट्रैटेजी का पहला कदम भी हो सकता है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, एनर्जी इकोनॉमिस्ट का कहना है कि ग्लोबल एनर्जी सिस्टम "अनदेखे इलाके" में आ गया है, क्योंकि इंश्योरेंस कंपनियों ने दुनिया के सबसे जरूरी ऑयल चोकपॉइंट से गुजरने वाले जहाजों के लिए वॉर रिस्क कवर अचानक वापस ले लिया है।

क्या है इस संकट की वजह?

इकोनॉमिस्ट ने कहा, "हम क्रूड ऑयल, रिफाइंड प्रोडक्ट्स, एलएनजी, नेचुरल गैस लिक्विड्स, फर्टिलाइजर्स, मेथनॉल और दूसरे पेट्रोलियम डेरिवेटिव्स समेत कई एनर्जी और कमोडिटी मार्केट्स में नए क्षेत्र में जा रहे हैं।" इस संकट की वजह टैंकरों पर ईरान का सीधा हमला नहीं था, बल्कि एक फाइनेंशियल झटका था जिसने लगभग रातों-रात शिपिंग एक्टिविटी रोक दी थी।

'ऐसा पहले कभी नहीं हुआ'

इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, बड़ी यूरोपियन और ग्लोबल इंश्योरेंस कंपनियों ने अचानक होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए युद्ध के जोखिम का कवरेज रद कर दिया या प्रीमियम इतना बढ़ा दिया कि जहाज मालिकों ने जहाज चलाना ही बंद कर दिया। उन्होंने कहा, "किसी ने भी इसकी उम्मीद नहीं की थी। हालांकि हाल के दशकों में दुनिया ने शिपिंग में रुकावटें देखी हैं, लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।"

होर्मुज जलडमरूमध्य ग्लोबल एनर्जी ट्रेड में सबसे जरूरी रास्तों में से एक है। दुनिया की तेल सप्लाई का लगभग 15 से 20 प्रतिशत और दुनिया भर में एलएनजी शिपमेंट का लगभग 20 प्रतिशत, फारस की खाड़ी को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने वाले पतले पानी के रास्ते से होकर गुजरता है।

ट्रंप की चुप्पी

यह रुकावट ईरानी मिलिट्री एक्शन से कम और ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के अंदर लिए गए फैसलों से ज्यादा हो रही है। तेल की ज्यादा कीमतों की अक्सर आलोचना करने के बावजूद यूएस प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप इंश्योरेंस संकट पर ज्यादातर चुप रहे हैं, जबकि इससे ग्लोबल ट्रेड में रुकावट आ रही है और एनर्जी की कीमतें बढ़ रही हैं।

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