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अमेरिका-ईरान के बीच समझौता लागू, स्विटजरलैंड में आज आमने सामने होंगे वाशिंगटन-तेहरान के अधिकारी

Published: Fri, 19 Jun 2026 05:30 AM (GMT+05:30)Updated: Fri, 19 Jun 2026 07:08 AM (GMT+05:30)

पहले दोनों देशों के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आमने-सामने हस्ताक्षर होने थे, लेकिन महत्वपूर्ण वार्ता में समय न गंवाने के उद्देश्य से इसे पहले ही मंजूरी दे दी गई।

अमेरिका-ईरान के बीच समझौता लागू (फोटो- रॉयटर)

अमेरिका-ईरान के बीच समझौता लागू (फोटो- रॉयटर)

HighLights

  1. समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने किए वर्चुअल हस्ताक्षर

  2. वर्साय पैलेस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ डिनर के वक्त ट्रंप ने समझौते पर किए हस्ताक्षर, तेहरान में थे पेजेश्कियान

  3. होर्मुज से पहली बार निकले सऊदी अरब के तीन सुपर टैंकर, अन्य जहाजों की भी गतिविधि बढ़ी 

  4. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 60 दिनों के लिए समझौता लागू होने की आधिकारिक पुष्टि की

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। 47 वर्षों की कटुता और 107 दिनों तक चले संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टाक रिजॉर्ट में ऐतिहासिक शांति वार्ता के लिए आमने-सामने होंगे, जहां समझौते के क्रियान्वयन और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी।

इससे पहले बुधवार रात (भारतीय समयानुसार गुरुवार तड़के) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों के साथ रात्रिभोज के दौरान 14 सूत्रीय प्रारंभिक समझौता मसौदे (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसे इस्लामाबाद मेमोरैंडम आफ अंडरस्टैंडिंग नाम दिया गया है।

पेजेश्कियान ने भी इस पर हस्ताक्षर किए

तेहरान में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी इस पर हस्ताक्षर किए, जबकि मध्यस्थ और गारंटर के रूप में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दस्तखत किए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि डिजिटल हस्ताक्षरों के साथ ही आधिकारिक तौर पर समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।

पहले दोनों देशों के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आमने-सामने हस्ताक्षर होने थे, लेकिन महत्वपूर्ण वार्ता में समय न गंवाने के उद्देश्य से इसे पहले ही मंजूरी दे दी गई।

पाकिस्तान और कतर के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे

रॉयटर ने स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय के हवाले से बताया कि वार्ता में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के अलावा पाकिस्तान और कतर के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

हालांकि, बैठक के विस्तृत कार्यक्रम और एजेंडे के बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, समझौते की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की

कीमतें लगभग दो प्रतिशत गिरकर तीन महीने के निचले स्तर (78 डालर प्रति बैरल) पर पहुंच गईं, जबकि प्रमुख शेयर बाजारों में तेजी देखी गई। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही भी तेज हो गई है।

सऊदी अरब के तीन सुपरटैंकर होर्मुज से निकले

ईरान युद्ध के बाद पहली बार सऊदी अरब के तीन सुपरटैंकर होर्मुज से निकले। इसके अलावा कई और जहाजों के भी निकलने की सूचना है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यातायात पूरी तरह सामान्य होने में लगभग एक माह और तेल उत्पादन को सामान्य स्तर पर लौटने में अक्टूबर तक का समय लग सकता है, लेकिन जल्दी ही कच्चे तेल की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल पर आ सकती हैं।

ईरानी बंदरगाहों से नाकेबंदी पूरी तरह हटा ली गई है

शिपिंग कंपनियों के अनुसार 16 से 18 जून के बीच 40-50 जहाज होर्मुज के पश्चिम हिस्से से बाहर निकले हैं। उधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) ने एक्स पर जानकारी दी कि ईरानी बंदरगाहों से नाकेबंदी पूरी तरह हटा ली गई है।

एपी के अनुसार, व्हाइट हाउस में प्रेस ब्रीफिंग में वेंस ने कहा कि अमेरिकी नौसेना ने अपनी नाकेबंदी हटा ली है और दर्जनों जहाजों को ईरानी बंदरगाहों से गुजरने की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि गुरुवार को 1.25 करोड़ बैरल तेल होर्मुज स्ट्रेट से निकला है।

अमेरिका में गैस की कीमतें 4 डॉलर से नीचे गिर गईं

वेंस के अनुसार, अमेरिका में तेल की कीमतें घटकर युद्ध से पहले के चार डॉलर प्रति गैलन पर पहुंच गई हैं। वेंस ने कहा कि ईरान समझौते का सम्मान कर रहा है और लगातार दूसरे दिन उसने होर्मुज स्ट्रेट में किसी जहाज को निशाना नहीं बनाया।

समझौते की प्रमुख बातें
रॉयटर के अनुसार, 14 बिंदुओं वाले प्रारंभिक मसौदे में 60 दिनों के युद्धविराम पर सहमति बनी है। इस अवधि में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, संवर्धित यूरेनियम और अन्य विवादित मुद्दों पर विस्तृत बातचीत होगी।

एमओयू के अनुसार, अगले 60 दिनों तक ईरान जहाजों के आवागमन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेगा। हालांकि, ईरान ने कहा है कि इस अवधि में उसे सेवा शुल्क लेने का अधिकार होगा।

साथ ही विदेश में फ्रीज ईरानी संपत्तियों और धनराशि को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। ईरान के विकास और पुनर्निर्माण के लिए अमेरिका समर्थित 300 अरब डॉलर के आर्थिक कार्यक्रम पर भी सहमति बनी है।

इस दौरान ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम में यथास्थिति बनाए रखेगा तथा उच्च संवर्धित यूरेनियम को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) की निगरानी में कम संवर्धित करने और उसके निपटान पर चर्चा होगी।

107 और वर्साय पैलेस का रोचक संयोग

एएनआई के अनुसार, वर्साय पैलेस इस समझौते के कारण एक बार फिर इतिहास के केंद्र में आ गया है। इसी महल में 1919 में प्रथम विश्व युद्ध समाप्त करने वाली वर्साय संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। संयोग से 107 वर्ष बाद इसी स्थान पर ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए।

एक अन्य संयोग यह भी है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के 107 दिनों बाद यह समझौता सामने आया। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच इस स्तर की प्रत्यक्ष वार्ता हो रही है। संघर्ष के दौरान लगभग 7,000 लोगों की मौत हुई।

खामेनेई ने अनिच्छा के बावजूद दी समझौते को मंजूरी

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि उन्होंने अमेरिका के साथ हुए प्रारंभिक समझौता मसौदे (एमओयू) को अपनी व्यक्तिगत आपत्तियों के बावजूद मंजूरी दी।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि समझौते में ईरान के अधिकारों और "रेजिस्टेंस फ्रंट" के हितों की रक्षा की जाएगी।

खामेनेई के अनुसार, पेजेश्कियान ने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि अमेरिका तय शर्तों से आगे बढ़कर कोई अतिरिक्त मांग करता है तो ईरान उसके आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका से सीधी वार्ता का मतलब उसके रुख को स्वीकार करना नहीं है।

ईरान युद्ध में मदद न करने पर नाटो देशों पर भड़के हेगसेथ

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ न देने के लिए सैन्य संगठन नाटो के सहयोगी देशों को आड़े हाथों लिया। कहा कि अमेरिका के बगैर नाटो कागजी शेर है। सहयोगी देशों के इसी रुख के चलते अमेरिका ने यूरोप में तैनात सैनिकों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है। हेगसेथ ने पोलैंड में अमेरिका का मुख्य सैन्य ठिकाना बनाने का भी संकेत भी दिया है। अभी यह मुख्य ठिकाना जर्मनी में है।

ब्रसेल्स स्थित नाटो के मुख्यालय में सहयोगी देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ बैठक में हेगसेथ ने कहा कि ईरान युद्ध के दौरान नाटो के सहयोगी देशों का रुख शर्मनाक रहा। उन्होंने चेताया कि ये एकतरफा रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चलेगा।