होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी पर भड़के ईरान ने दी चेतावनी, मिलेगा करारा जवाब
अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान पर समुद्री नाकेबंदी शुरू कर दी है, जिससे खाड़ी में तनाव बढ़ गया है। ...और पढ़ें
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होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी पर भड़का ईरान(फाइल फोटो)

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी अब होर्मुज पर केंद्रित हो गई है। खाड़ी में गहराए तनाव से दुनियाभर में एक बार फिर युद्ध की तस्वीरें ताजा होने लगी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की तरफ से ईरान पर लगाई गई समुद्री नाकाबंदी सोमवार शाम 7.30 बजे से शुरू हो गई। ट्रंप ने चेताया है कि ईरान को टोल देकर गुजरनेवाले जहाजों को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
साथ ही अगर ईरानी जहाजों की तरफ से युद्धपोतों या व्यापारिक जहाजों पर हमला होता है तो उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा। साथ ही, अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा है कि ईरानी तेल खरीदनेवाले देशों पर सख्ती से मुकदमा चलाया जाएगा। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने पलटवार करते हुए कहा कि समुद्री नाकाबंदी को 'डकैती' की तरह माना जाएगा और उसी के अनुरूप निपटा जाएगा।
निशाने पर खाड़ी देशों के बंदरगाह
अमेरिकी युद्धपोतों के साथ-साथ खाड़ी देशों के बंदरगाह भी निशाने पर होंगे। अमेरिकी युद्धपोत होर्मुज की तरफ बढ़े तो इसे युद्धविराम का उल्लंघन मानकर कार्रवाई की जाएगी। अमेरिकी नाकेबंदी के बाद होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। समुद्री जहाजों पर नजर रखनी वाली वेबसाइट मरीन ट्रैफिक ने होर्मुज का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें वो इलाका पूरी तरह खाली नजर आ रहा है।
आशंकाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आठ प्रतिशत तक बढ़कर 100 डालर के पार (102 डालर प्रति बैरल) चले गए। युद्धविराम के बाद से केवल 40 जहाज की होर्मुज से गुजर सके हैं, जबकि सामान्य परिस्थितियों में 140 टैंकर गुजरते थे। इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने जहां ट्रंप के फैसले का समर्थन किया, वहीं नाटो देशों के साथ-साथ रूस और चीन ने आलोचना की है।
ब्रिटेन और फ्रांस ने इस विवाद में पड़ने से साफ इनकार कर दिया है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा कि होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों से कोई टोल नहीं लिया गया है। ईरान यहां से भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने में मदद करेगा।गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के दौरान शांति वार्ता विफल होने के बाद से तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी देशों के लिए खुलवाना
अब अमेरिका के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। अमेरिका न केवल होर्मुज को पहले की तरह सभी के लिए खुलवाना चाहता था, बल्कि वह ईरान के साथ इस अहम रणनीतिक जलमार्ग पर संयुक्त नियंत्रण भी चाहता है। इस जलमार्ग से दुनिया की जरूरत का 20 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस सप्लाई होता है। ईरान इस जलमार्ग से गुजरनेवाले जहाजों से प्रति बैरल दो डालर टोल ले रहा है।
इस पर ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज के बाहर नाकाबंदी करेगी और ये जांच करेगी कि होर्मुज से गुजरनेवाले जहाजों ने ईरान को टोल तो नहीं दिया। टोल न देनेवाले जहाजों को ही गुजरने का अधिकार होगा।
अमेरिकी सेंटकाम ने कहा, नाकाबंदी निष्पक्ष लागू होगी
न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) ने सोमवार से ईरान के सभी बंदरगाहों में आने-जाने वाले समुद्री यातायात की नाकेबंदी लागू कर दी है। सेंटकाम के अनुसार, यह नाकेबंदी निष्पक्ष रूप से सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों, खासकर अरब सागर और ओमान की खाड़ी के बंदरगाहों में प्रवेश या निकास करेंगे।
हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही बाधित नहीं की जाएगी, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात प्रभावित न हो। गौरतलब है कि यूएसएस जेराल्ड फोर्ड और अब्राहम लिंकन होर्मुज के आसपास गश्त कर रहे हैं।
वहीं, ट्रंप ने कहा कि अब तक ईरान के छोटे फास्ट ट्रैक जहाजों को निशाना नहीं बनाया गया है, क्योंकि हम उन्हें बड़ा खतरा नहीं मानते थे। लेकिन नाकाबंदी के बाद यदि ऐसे जहाज युद्धपोतों के इर्द-गिर्द आने की कोशिश करेंगे तो उनका तत्काल सफाया कर दिया जाएगा। ये तुरंत और घातक होगा। हम ऐसे तरीके समुद्री ड्रग तस्करों से निपटने में करते हैं।
ईरानी तेल खरीद पर अमेरिका की सख्त चेतावनी
रायटर के अनुसार, इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान के प्रतिबंधित तेल के कारोबार पर भी सख्त चेतावनी दी है। कार्यवाहक अटार्नी जनरल टोड ब्लांश ने एक्स पर लिखा कि न्याय विभाग राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेना के कदमों का समर्थन करता है। जो भी देश ईरानी तेल की खरीद या बिक्री में शामिल होगी, उसके खिलाफ कड़ाई से मुकदमा चलाया जाएगा।
इस बयान को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। रिवोल्यूशनरी गार्ड का जवाब एपी के अनुसार, ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आइआरजीसी) ने साफ कर दिया है कि होर्मुज बर हमारा पूरा नियंत्रण है और ये रास्ता असैन्य जहाजों के लिए खुला है, लेकिन सैन्य जहाजों से सख्ती से निपटा जाएगा।
फारस की खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सभी के लिए होगी या फिर किसी के लिए नहीं। कहा है कि यदि ईरान के बंदरगाहों की सुरक्षा को खतरा हुआ, तो क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।
ईरान के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने एक्स पर लिखा कि होर्मुज नाकेबंदी का मुकाबला करने के लिए देश की सशस्त्र सेनाओं के पास अभी भी कई बड़े और अप्रयुक्त विकल्प मौजूद हैं। वहीं, गलीबाफ ने कहा कि अगर आप लड़ेंगे तो हम भी लड़ेंगे।
तेल कीमतों पर ईरान ने अमेरिका का उड़ाया मजाक
एअनआइ के अनुसार, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट में अमेरिका में तेल की कीमतों की तस्वीर साझा की और लिखा कि पेट्रोल पंप की मौजूदा कीमतों का आनंद लें। नाकेबदी के बाद जल्दी ही आपको 4-5 डालर के पेट्रोल की याद आने लगेगी। इससे पहले ट्रंप ने रविवार को कहा था कि अमेरिका में तेल की कीमतें इस साल नवंबर में होनेवाले मध्यावधि चुनाव तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
फ्रांस-ब्रिटेन जैसे नाटो देशों ने खड़े किए हाथ
रायटर के अनुसार, बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस और ब्रिटेन ने सुरक्षित नौवहन बहाल करने के लिए बहुराष्ट्रीय पहल का नेतृत्व करने का एलान किया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यह मिशन पूरी तरह रक्षात्मक होगा और मौजूदा संघर्ष से अलग रखा जाएगा। मैक्रों ने बताया कि आने वाले दिनों में इच्छुक देशों के साथ एक सम्मेलन बुलाया जाएगा, ताकि इस अहम समुद्री मार्ग में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि उनका देश ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकेबंदी का समर्थन नहीं करेगा और युद्ध में नहीं शामिल होगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन का फोकस केवल होर्मुज मार्ग को फिर से खोलने पर है। ब्रिटेन ने संकेत दिया कि वह संघर्ष समाप्त होने के बाद जलमार्ग में बारूदी सुरंग हटाने में सहयोग कर सकता है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम इस मार्ग के बंद होने से तेल कीमतों में उछाल देखा जा रहा है।इजरायल ने हमले घटाए, हिजबुल्ला का वार जारी इस सप्ताह अमेरिका में लेबनान के साथ शांति वार्ता को देखते हुए इजरायल ने हिजबुल्ला के खिलाफ सैन्य अभियान कम कर दिया है।
हालांकि, इजरायल के ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने लेबनान के नागरिक इलाकों में भी हमले करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लेबनान सरकार और हिजबुल्ला में ज्यादा अंतर नहीं समझना चाहिए। एएनआइ के अनुसार, कोहेन ने कहा कि लेबनान के राष्ट्रीय ढांचों, जिनमें बेरूत हवाई अड्डा, बंदरगाह और बिजली स्टेशनों को भी निशाना बनाया जाना चाहिए। वहीं, हिजबुल्ला ने दावा किया है कि इजरायल के 43 सैन्य ठिकानों पर रविवार को हमले किए गए हैं। लेबनान में दो मार्च के बाद से 2055 लोग मारे गए हैं।
