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ऑयल टर्मिनल और 90% कच्चे तेल का एक्सपोर्ट...खार्ग द्वीप से ट्रंप को क्या मिल सकता है?

Published: Mon, 30 Mar 2026 11:44 PM (GMT+05:30)

ट्रंप की नजर ईरान के खार्ग द्वीप पर है, जो उसके 90% कच्चे तेल निर्यात का केंद्र है। अमेरिका इस ...और पढ़ें

खार्ग द्वीप से ट्रंप को क्या मिल सकता है। (फाइल)

खार्ग द्वीप से ट्रंप को क्या मिल सकता है। (फाइल)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। खाड़ी में युद्ध के बीच ट्रंप की नजर अब ईरान के खार्ग द्वीप है, जिसको लेकर वे कई बार अपनी चाहत जगजाहिर कर चुके हैं। खार्ग द्वीप ईरानी तेल उद्योग का मुख्य केंद्र है। तेहरान पर दबाव बनाने के लिए ट्रंप खार्ग द्वीप पर कब्जे की तैयारी में हैं।

सोमवार को ट्रंप ने कसम खाई कि अगर ईरान युद्ध खत्म करने के लिए किसी समझौते पर तैयार नहीं होता, तो अमेरिका इस एक्सपोर्ट हब को पूरी तरह से तबाह कर सकता है। एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि अमेरिका इस द्वीप पर बहुत आसानी से कब्जा कर सकता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ट्रंप के पास विकल्प क्या है और अगर वह इस दबाव वाले बिंदु पर जोर डालते हैं तो ईरान कैसे प्रतिक्रिया दे सकता है?

क्या है खार्ग द्वीप?

खार्ग द्वीप एक छोटा सा जमीन का टुकड़ा है, जो ईरान का 90 प्रतिशत कच्चे तेल के एक्सपोर्ट को संभालता है। यहां ईरान का सबसे बड़ा ऑयल टर्मिनल, तेल की पाइपलाइनें, स्टोरेज टैंक और संबंधित बुनियादी ढांचा मौजूद है। यहां सैन्य सुविधाएं भी हैं, जिनमें से कुछ पर पहले ही इजराइली-अमेरिकी हमलों में निशाना साधा जा चुका है।

सेटकॉम ने 13 मार्च को कहा कि अमेरिकी सेनाओं ने खार्ग द्वीप पर बड़े पैमाने पर हमला किया। इस हमले में नौसैनिक खदानों के स्टोरेज की सुविधाएं, मिसाइल स्टोरेज बंकर और कई अन्य सैन्य ठिकाने नष्ट हो गए। अमेरिकी सेनाओं ने खर्ग आइलैंड पर 90 से ज्यादा ईरानी सैन्य लक्ष्यों पर सफलतापूर्वक हमला किया, जबकि तेल के बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखा।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के करीबी सूत्रों ने CNN को बताया कि ईरान ने हाल के हफ्तों में इस क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक और रक्षा प्रणालियां तैनात की हैं, जिनमें MANPAD-प्रकार की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और खदानें शामिल हैं।

ट्रंप के पास क्या विकल्प?

आइलैंड पर कब्जा करने की इच्छा रखने वाली अमेरिकी सेनाओं के लिए तीन रास्ते दिखाई देते हैं। हवाई हमला; जल और जमीन पर ऑपरेशन; या दोनों का मिला-जुला रूप। पेंटागन अभी इस इलाके में अमेरिकी पैराट्रूपर्स और मरीन सैनिकों को भेज रहा है।

अमेरिकी थिंक टैंक सूफान ने कहा कि अमेरिकी सेना का जमावड़ा ईरान में संभावित जमीनी हमले की जमीन तैयार करता है। सेंटकॉम के पूर्व कमांडर जनरल जोसेफ वोटेल ने इस महीने 'द वॉर जोन' वेबसाइट को बताया कि खार्ग पर कब्जा करने के लिए बहुत ज्यादा सैनिकों की जरूरत नहीं पड़ेगी।

उन्होंने कहा, "खार्ग जैसे छोटे से द्वीप पर, मेरा अंदाजा है कि आपको मरीन की एक बटालियन की जरूरत पड़ेगी। इसलिए हम 800 से 1,000 सैनिकों वाली सेना की बात कर रहे हैं, शायद थोड़े कम भी हो सकते हैं, लेकिन निश्चित रूप से इससे बहुत ज्यादा नहीं। लेकिन स्कॉटलैंड की सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फिलिप्स ओ'ब्रायन ने जोर देकर कहा कि खार्ग पर कब्जा करना और उसे अपने कब्जे में बनाए रखना "दो अलग-अलग बातें हैं।"

उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना को ईरानी मिसाइलों और ड्रोन की मारक सीमा के भीतर इस द्वीप को अपने कब्ज़ में बनाए रखने में काफी मुश्किल होगी।

ऐसा क्यों किया जाए?

ट्रंप के युद्ध के लक्ष्य अभी भी साफ नहीं हैं। यह साफ नहीं है कि वह मुख्य रूप से ईरान को होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के आने-जाने के रास्ते फिर से खोलने के लिए मजबूर करना चाहते हैं या तेहरान में सत्ता परिवर्तन करवाना चाहते हैं, या फिर ईरानियों को उनके परमाणु या बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के मामले में रियायतें देने के लिए मजबूर करना चाहते हैं।

सूफान सेंटर ने कहा कि कम समय के लिए, खार्ग पर कब्जा करने से वॉशिंगटन को ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करने का एक जरिया मिल सकता है। शायद ट्रंप की शर्तों पर ही, क्योंकि उस देश की अर्थव्यवस्था तेल से होने वाली कमाई पर ही निर्भर करती है। हालांकि, खाड़ी में जहाजो के आने-जाने के रास्ते फिर से खोलने में इसका शायद ज्यादा असर न पड़े, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूद कई दूसरे द्वीपों पर भी ईरान का ही कब्जा है।

(समाचार एजेंसी एएफपी के इनपुट के साथ)

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