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ईरान की ढाल बना होर्मुज स्ट्रेट का संकरा रास्ता, अमेरिका के लिए क्यों आसान नहीं है इसे खोलना?

Published: Fri, 27 Mar 2026 06:48 PM (IST)Updated: Fri, 27 Mar 2026 08:40 PM (IST)

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक टकराव का केंद्र बन गया है। ईरान ने अमेरिका-इजरायल संघर्ष के ...और पढ़ें

ईरान की ढाल बना होर्मुज स्ट्रेट का संकरा रास्ता। (रॉयटर्स)

ईरान की ढाल बना होर्मुज स्ट्रेट का संकरा रास्ता। (रॉयटर्स)

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दीपक गुप्ता, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का सबसे अहम केंद्र बन गया है। ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने इस संकरे जलमार्ग को एक खतरनाक चोकपॉइंट में बदल दिया है। जिसके कारण यहां से गुजरने वाला वैश्विक तेल व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। 

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद तेहरान ने होर्मुज पर कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने न केवल मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं, बल्कि दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को भी बंद कर दिया है। ईरान इस संकरे रास्ते का इस्तेमाल अपने लिए ढाल की तरह कर रहा है।

हालांकि, ईरान ने भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान जैसे मित्र देशों के लिए सीमित रास्ता खुला रखा है। ईरान के विदेश मंत्री ने साफ किया है कि होर्मुज स्ट्रेट खुला है, लेकिन दुश्मन देशों के जहाजों के लिए बंद है।

इस संकट से फारस की खाड़ी में सैकड़ों तेल टैंकर फंसे हुए हैं। युद्ध से पहले रोजाना करीब 80 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, लेकिन अब इस संख्या में काफी गिरावट आई है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ रहा है।

Strait hormuz reuters

मौजूदा संकट के बीच होर्मुज स्ट्रेट को खोलना किसी के लिए भी आसान नहीं है। इसके पीछे न केवल ईरान की बारूदी धमकी है, बल्कि यहां की भौगोलिक स्थिति एक बड़े हथियार के रूप में सामने आ रही है।

क्यों खोलना मुश्किल है होर्मुज?

भौगोलिक चुनौती बनी ईरान का हथियार

होर्मुज स्ट्रेट बेहद संकरा और उथला समुद्री जलमार्ग है, जहां से जहाजों को ईरान के बेहद करीब से गुजरना पड़ता है। ईरान का पहाड़ी तटीय इलाका उसे प्राकृतिक सुरक्षा देता है। ईरान ने अपने मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और हथियार पहाड़ी इलाकों, गुफाओं और सुरंगों में छिपा रखे हैं, जिससे जहाजों पर हमला करना बेहद आसान हो जाता है।

ईरानी मिसाइल और ड्रोन का खतरा

होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर यदि ईरान मिसाइल या ड्रोन से हमले करता है तो जहाजों के पास रिएक्शन के लिए बहुत कम समय होता है, या कहें कि कुछ ही मिनट होते हैं। ऐसे में जहाजों के ईरानी मिसाइलों के शिकार होने का खतरा बना रहता है। अब तक 17 जहाज हमले का शिकार हो चुके हैं।

 Strait of Hormuz Becomes a War Chokepoint

समुद्र में बारूदी सुरंग

ईरान ने समुद्र में बारूदी सुरंग बिछा रखी हैं, अगर अमेरिका किसी समझौते के बाद उन्हें हटाने की कोशिश करता है, तो इसमें हफ्तों का समय लग सकता है। इस दौरान जहाजों और सुरक्षा बलों की को लगातार खतरा बना रहेगा।

अमेरिका के लिए आसान नहीं सैन्य समाधान

जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने जहाजों को सैन्य सुरक्षा देने की बात कही है, लेकिन यह बेहद कठिन और जोखिम भरा होगा। युद्धपोतों को ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाना आसान नहीं होगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी सैन्य कार्रवाई के लिए भारी मात्रा में संसाधन लेंगेंगे और फिर भी सफलता की गारंटी नहीं है।

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ट्रंप के रुख में लगातार बदलाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया जाएगा। हालांकि, अब ट्रंप का रुख थोड़ा नरम दिख रहा है। उन्होंने 5 दिन के लिए हमले टाल दिए हैं और कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक रही है। 

ईरान ने लागू किया 'टोल सिस्टम'

रिपोट्स के मुताबिक, IRGC ने एक तरह का टोल सिस्टम लागू कर दिया है। जहाजों को अब विशेष अनुमति, दस्तावेज और कोड के साथ ही एक निश्चित मार्ग से गुजरना पड़ रहा है। 13 मार्च के बाद से कम से कम 26 जहाज इस मार्ग से गुजर चुके हैं, जबकि सामान्य मार्ग लगभग बंद हो चुका है।

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बाब-अल-मंदेब पर मंडराया खतरा?

ईरान ने चेतावनी जारी की है कि अगर अमेरिका-इजरायल ने युद्ध को बढ़ाया तो वह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को भी निशाना बना सकता है। यह जल मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है, जो कि वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। अगर यहां भी संकट पैदा होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका साबित होगा।

क्या है इसका समाधान?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से इस संकट का हल संभव नहीं है। जब तक ईरान का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, जहाज कंपनियां इस मार्ग का इस्तेमाल करने से बचेंगी। इस संकट का समाधान कूटनीतिक और राजनीतिक समझौते से ही निकल सकता है। अभी के हालात में दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ी है।

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