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अमेरिका-ईरान टकराव में खुलकर उतरा सऊदी अरब, इराक भी बना संघर्ष का नया केंद्र

Published: Fri, 31 Jul 2026 05:37 AM (IST)Updated: Fri, 31 Jul 2026 07:00 AM (IST)

कुवैत में ईरानी हमले में एक चीनी कंपनी में कार्यरत नेपाल के एक नागरिक की मौत हो गई। वहीं, इराक ...और पढ़ें

अमेरिका-ईरान टकराव में खुलकर उतरा सऊदी अरब (फोटो- एक्स)

अमेरिका-ईरान टकराव में खुलकर उतरा सऊदी अरब (फोटो- एक्स)

HighLights

  1. सऊदी-अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से बगदाद में नाराजगी, इराकी पीएम ने क्राउन प्रिंस से मुलाकात रद की

  2. कुवैत में ईरानी हमले में चीनी कंपनी में कार्यरत नेपाली नागरिक की मौत, जार्डन ने पांच मिसाइलें मार गिराईं

  3. लाल सागर में बढ़ा तनाव, कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा, 11 जुलाई के बाद पहला टैंकर होर्मुज से निकला

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव थमने के बजाय और अधिक व्यापक होता जा रहा है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है, जिसका असर अब पूरे पश्चिम एशिया में दिखाई देने लगा है।

कुवैत में ईरानी हमले में एक चीनी कंपनी में कार्यरत नेपाल के एक नागरिक की मौत हो गई। वहीं, इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया पर सऊदी अरब की कार्रवाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) के छह सदस्यों सहित 26 लड़ाके मारे गए।

सऊदी अरब के खुलकर सैन्य अभियान में शामिल होने के बाद इराक भी इस संघर्ष का अहम केंद्र बनता जा रहा है। बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत फिर 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।

इराक से हूती हमले, बढ़ी रणनीतिक अहमियत

रॉयटर के अनुसार, सोमवार को यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह और पूर्वी क्षेत्र पर इराकी सरजमी से हमला किया था। इन हमलों की उपग्रह तस्वीरें भी सामने आई हैं।

प्लैनेट लैब्स की तस्वीरों में आरामको के अबकैक तेल प्रसंस्करण संयंत्र को भारी नुकसान दिखाई देता है। यहां प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल कच्चे तेल का शोधन होता है।

सूत्रों के मुताबिक, हूती विद्रोहियों को इराक में सक्रिय ईरान समर्थित समूहों का सहयोग मिल रहा है। हूती पहले ही सऊदी तेल ठिकानों पर हमलों की जिम्मेदारी ले चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीरिया में बशर अल-असद शासन खत्म होने और लेबनान में हिजबुल्ला की स्थिति कमजोर होने के बाद ईरान समर्थित नेटवर्क के लिए इराक का रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है।

इराक की लगभग 800 किलोमीटर लंबी सीमा सऊदी अरब से लगती है, जिससे यह क्षेत्र सैन्य दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। बढ़ते तनाव के बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने गुरुवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से प्रस्तावित मुलाकात भी रद कर दी।

सेंटकाम के अनुसार, सऊदी अरब पर हुए हमलों के जवाब में पूर्वी इराक में पापुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (पीएमएफ) के हथियार और लाजिस्टिक ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाई की गई।

अमेरिकी पक्ष का दावा है कि मिलिशिया ने 72 घंटे के भीतर 30 ड्रोन हमले किए थे, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। इस संयुक्त सैन्य अभियान के बाद इराक में नाराजगी बढ़ गई है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इराकी सेना के प्रवक्ता सबा अल-नुमान ने कहा कि अमेरिकी-सऊदी हमलों ने जांच प्रक्रिया को प्रभावित किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह साबित करने के लिए क्या सुबूत हैं कि सऊदी अरब पर हमले इराकी क्षेत्र से किए गए थे।

वहीं, ईरान समर्थित अल-वाद अल-सादेक मिलिशिया के प्रमुख मोहम्मद तमीमी ने चेतावनी दी कि अब बम का जवाब बम से दिया जाएगा।

एएनआई के अनुसार, सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की थी।

इसके बाद सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया पर हमला किया। माना जा रहा है कि यह ईरान को स्पष्ट संदेश देने के लिए किया गया कि खाड़ी देशों पर हमले अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

सेंटकाम ने भी दावा किया कि खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों को रोकने के लिए आइआरजीसी के दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया।

मिस्र के बंदरगाह पर ड्रोन हमला

रॉयटर के अनुसार, मिस्र के दैमिएता बंदरगाह पर ड्रोन हमले में प्राकृतिक गैस से लदे दो टैंकरों में आग लग गई। इनमें एक टैंकर अमेरिका और दूसरा ग्रीस का बताया गया है। हालांकि, इन हमलों की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है।

ट्रंप ने इसे ईरानी हमलों से मिलता-जुलता बताते हुए कहा, अब ईरानियों को जवाब देने की हमारी बारी है। इसके बावजूद दैमिएता बंदरगाह प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि बंदरगाह के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा है।

होर्मुज और लाल सागर में बढ़ा तनाव

एपी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले करने का दावा किया है, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाने की बात कही है।

ईरान ने दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण कायम है और अनधिकृत मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे तीन टैंकरों को चेतावनी देकर वापस लौटा दिया गया।

हालांकि, कतर का एलएनजी से भरा एक टैंकर होर्मुज पार करने में सफल रहा। शिप ट्रैकिंग डाटा के मुताबिक, 11 जुलाई के बाद यह पहला जहाज है जिसने इस मार्ग को पार किया।

लाल सागर में यमन के हाउती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के जहाजों की नाकेबंदी भी जारी है। वहीं, जार्डन ने लगातार दूसरे दिन ईरान की पांच मिसाइलें मार गिराने का दावा किया।

ईरान में अमेरिकी हमलों के दौरान केश्म द्वीप पर तीन लोगों के मारे जाने की भी खबर है। इसके अलावा, जांजान प्रांत में आइआरजीसी के तीन सदस्य भी मारे गए। इसके अलावा दर्जनों ठिकानों पर हमले हुए।

उधर, रॉयटर के अनुसार, ईरान को चीन से कंधे पर रखकर दागी जाने वाली 400 एयर डिफेंस मिसाइल लांचरों की पहली खेप जल्द मिल सकती है। हालांकि, चीन और ईरान के विदेश मंत्रालयों ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।