'अमेरिका ने खो दिया विदेश नीति से कंट्रोल, जबरदस्ती लड़ रहा युद्ध'; ओमान के मंत्री का ट्रंप पर निशाना
ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी ने दावा किया है कि इजरायल ने अमेरिका को ईरान के साथ युद्ध के ...और पढ़ें

ओमान के मंत्री ने अमेरिका पर साधा निशाना

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी ने दावा किया है कि इजरायल ने अमेरिका को ईरान के साथ युद्ध करने के लिए राजी किया। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान के मंत्री ने इस संघर्ष को एक गंभीर भूल और विनाशकारी बताया।
बदर अलबुसैदी ने द इकोनॉमिस्ट में लिखा, 'अमेरिका ने अपनी विदेश नीति पर से नियंत्रण खो दिया है और ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते के बावजूद वह इस संघर्ष में खिंच गया।'
समझौते के करीब था अमेरिका
ओमान के विदेश मंत्री अलबुसैदी ने दावा किया है कि फरवरी में जेनेवा में हुई परमाणु वार्ता के दौरान ईरान और अमेरिका समझौते के करीब थे।
बदर अलबुसैदी ने आगे लिखा, 'जब अमेरिका और इजरायल ने उन वार्ताओं के कुछ ही घंटों बाद ईरान पर हमले शुरू कर दिए, जिन्होंने शांति को वास्तव में संभव बना दिया था, तब ये एक एक झटका था, लेकिन कोई हैरानी की बात नहीं थी।'
अलबुसैदी ने आगे लिखा, 'आगे की बातचीत की योजना भी बनाई गई थी, लेकिन उसके तुरंत बाद ही सैन्य कार्रवाई शुरू हो गई।
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अमेरिका की सबसे बड़ी भूल
अलबुसैदी ने बताया, 'इजरायल के नेतृत्व ने डोनल्ड ट्रंप को युद्ध में शामिल होने के लिए राजी किया। लेकिन अमेरिकी प्रशासन की सबसे बड़ी भूल, खुद को इस युद्ध में खिंचने देना था।'
ओमान के विदेश मंत्री ने आगे लिखा, यह अमेरिका का युद्ध नहीं था और न ही अमेरिका और इजरायल को इस युद्ध का कोई स्पष्ट परिणाम दिख रहा था, जिससे वो अपना लक्ष्य हासिल कर सकें।
अलबुसैदी ने यह भी कहा कि अमेरिका और इजरायल के किए गए सैन्य हमले अवैध थे और उनसे अंतरराष्ट्रीय कानून को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
इजरायल ने सभी दावे किए खारिज
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ओमान के विदेश मंत्री के सभी दावों को खारिज कर दिया है। इन दावों के जवाब में नेतन्याहू ने कहा, 'क्या सचमुच किसी को ऐसा लगता है कि कोई राष्ट्रपति ट्रंप को यह बता सकता है कि उन्हें क्या करना चाहिए?'
ओमान उन खाड़ी देशों में से एक है, जिस पर इस जंग का असर पड़ रहा है। ओमान इस संघर्ष में कूटनीतिक समाधान की मांग कर रहा है। इस क्षेत्र के अन्य राज्यों ने भी चेतावनी दी है कि यह युद्ध ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा को अस्थिर कर सकता है।
