डर के साए में वैश्विक अर्थव्यवस्था: कहीं आने वाली तो नहीं है बड़ी मंदी, वैश्विक निवेशक क्या कह रहे?
मध्य पूर्व में तनाव के कारण वैश्विक निवेशकों में मंदी का डर बढ़ गया है। कतर के गैस क्षेत्र पर ...और पढ़ें

डर के साए में वैश्विक अर्थव्यवस्था: कहीं आने वाली तो नहीं है बड़ी मंदी, वैश्विक निवेशक क्या कह रहे?
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से वैश्विक स्तर पर निवेशकों मंदी का माहौल सा बन गया है। मध्य पूर्व में एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों ने यह आशंका बढ़ा दी है कि इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी। यही कारण है कि एक बार फिर से वैश्विक निवेशकों में इस बात का डर और बढ़ गया है कि कहीं ईरान संघर्ष दुनिया को एक बड़ी मंदी (Recession fears) की ओर तो नहीं ले जा रहा है।
कतर के पेट्रोलियम लिक्वीफाइड गैस क्षेत्र पर ईरानी हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया। ईरान ने यह हमला अमेरिका-इजरायल द्वारा उसके गैस फील्ड पर किए गए हमले के जवाब में किया। इस हमले के बाद लंदन में गुरुवार को ब्रेंट क्रूड का वायदा 5.5% बढ़कर US$113.53 प्रति बैरल चला गया। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट के कॉन्ट्रैक्ट्स 1 प्रतिशत बढ़कर US$97.44 पर पहुंच गए।
ईरान संघर्ष को लेकर क्या बोले एक्सपर्ट?
Global CIO Office के CEO गैरी डगन ने ईरान संघर्ष के ताजा डेवलपमेंट पर कहा-" कतर के गैस क्षेत्रों पर हुए हमले ने खाड़ी संकट को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक ज्यादा खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है। तेल और गैस, दोनों की सप्लाई में रुकावट से कीमतें बढ़ रही हैं और ईंधन की असली कमी का खतरा भी बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक विकास में काफी बाधा आ सकती है।"
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से इंटरनेशनल इन्वेस्टर्स अब सुरक्षित निवेश पर की ओर भाग रहे हैं। पहले जहां चिंता सिर्फ तेल की सप्लाई में देरी को लेकर थी, अब मामला असली आपूर्ति में रुकावट का बन गया। यानी होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से यही नहीं सुनिश्चित हो पा रहा है कि कच्चे तेल की आपूर्ति हो पाएगा या नहीं।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार डॉलर 100 के आसपास स्थिर है जो यह दर्शा रहा है कि निवेशख सुरक्षित विकल्पों में पैसा लगा रहे थे। वहीं शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली। एसएंडपी 500 लगभग 1.4% गिरा, हैंग सेंग करीब 2% नीचे आया और शंघाई कंपोजिट भी 1.4% गिरकर 4000 के स्तर से नीचे बंद हुआ।
क्या बोले एक्सपर्ट?
SPI एसेट मैनेजमेंट के स्टीफन इनेस के मुताबिक, पहले कीमतों पर असर लॉजिस्टिक्स (आवागमन) से जुड़ा था, लेकिन अब यह असली उत्पादन (production) पर निर्भर हो गया है। जहाजों का रास्ता बदला जा सकता है या पाइपलाइन का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन अगर तेल या गैस का उत्पादन ही प्रभावित हो जाए, तो उसे दोबारा ठीक करने में काफी समय लगता है।
एबरडीन इन्वेस्टमेंट्स के अर्थशास्त्री जॉन बुचर ने कहा, "अगर यह बड़ा जोखिम सच हो जाता है कि संघर्ष लंबा खिंचता है, और तेल की कीमतें लंबे समय तक US$100 प्रति बैरल से काफी ऊपर बनी रहती हैं, तो महंगाई का असर सामानों की एक बड़ी टोकरी पर पड़ेगा, और हो सकता है कि Fed का अगला कदम इस साल के आखिर में दरों में बढ़ोतरी हो, न कि कटौती।"
बढ़ सकती है महंगाई
ईरान संघर्ष की वजह से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड (ट्रेजरी) की लंबी अवधि की यील्ड थोड़ी बढ़ी, जिससे महंगाई बढ़ने की चिंता दिखी। सोने की कीमत भी घटी (Gold Price Crashes), क्योंकि निवेशकों ने दूसरे निवेशों में हुए नुकसान को पूरा करने के लिए सोना बेचकर मुनाफा निकाला।
पहले निवेशकों को लग रहा था कि ईरान और अमेरिका-इजरायल (Iran Israel War) के बीच तनाव जल्दी खत्म हो जाएगा, इसलिए बाजार ज्यादा नहीं घबराया था। यहां तक कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद भी इसे सिर्फ एक अस्थायी समस्या माना जा रहा था, क्योंकि यह दुनिया के करीब 20% तेल के ट्रांसपोर्ट का अहम रास्ता है।
लेकिन जब ऊर्जा से जुड़ी असली संपत्तियों (जैसे तेल और गैस के फील्ड) पर हमले हुए, तो स्थिति बदल गई। अब समस्या सिर्फ जहाजों के रास्ते बदलने की नहीं रही, बल्कि नुकसान को ठीक करने की हो गई, जिसमें हफ्तों या महीनों का समय लग सकता है।
