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आइजेनकोट के साथ सरकार बनाने को नेतन्याहू तैयार, क्या अरब पार्टियों का सता रहा डर? इजरायल चुनाव की पूरी कहानी

Published: Mon, 02 Nov 2026 03:08 PM (IST)

इजरायल में राजनीतिक अस्थिरता के बीच नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने को तैयार हैं, क्योंकि उन्हें सत्ता गंवाने का डर है।

नेतन्याहू आइजनकोट के साथ सरकार बनाने को तैयार

नेतन्याहू आइजनकोट के साथ सरकार बनाने को तैयार

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डिजिटल डेस्क, येरुशलम। इजरायल में राजनीतिक अस्थिरता अपने चरम पर है। नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने तैयार हैं। इजराइली मीडिया i24 न्यूज के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अब विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने की तैयारी में जुट गए हैं।

नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ा डर यह है कि अगर आइजेनकोट ने अरब पार्टियों के समर्थन से वैकल्पिक सरकार बना ली, तो उन्हें अपनी सत्ता गंवानी पड़ सकती है। यह वजह है कि नेतन्याहू ने आइजेनकोट के साथ विकल्प को खुला रखा है, हालांकि विपक्षी नेता की ओर से इस पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

नेतन्याहू के सामने तीन रास्ते

सरकार बनाने के लिए नेतन्याहू के सामने तीन रास्ते हैं। पहला, नेतन्याहू विपक्ष के 48 सांसदों में से कुछ दलों या सांसदों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे वे बहुमत के आंकड़े (61) तक पहुंच सकें।

दूसरा, विकल्प राष्ट्रीय एकता सरकार है, इस विकल्प के तहत नेतन्याहू, विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट और उनके सहयोगियों के साथ मिलकर एक मिली-जुली सरकार बना सकते हैं। इसमें नेतन्याहू प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं और विपक्ष को भी सत्ता में हिस्सेदारी मिल जाएगी

तीसरा, अल्पमत सरकार, नेतन्याहू ऐसी सरकार भी बना सकते हैं जिसके पास अपने दम पर 61 सीटें न हों, लेकिन अन्य दल संसद में उनका विरोध न करें या बाहर से समर्थन दें।

आइजेनकोट के पास क्या हैं विकल्प?

अरब पार्टियों का समर्थन: जॉइंट लिस्ट और राअम जैसी अरब पार्टियों ने रविवार को आइजेनकोट को समर्थन देने का एलान किया है। यदि अन्य विपक्षी दल भी साथ आ जाएं, तो उनके पास 67 सांसदों का मजबूत समर्थन हो सकता है, जो बहुमत से 6 ज्यादा है।

यहूदी दलों को साथ लाना: आइजेनकोट अरब पार्टियों के बजाय कट्टरपंथी यहूदी धार्मिक दलों (जैसे यूनाइटेड तोराह जूडिज्म - UTJ) को अपने पाले में लाने का प्रयास कर सकते हैं। यदि ये दल मान जाते हैं, तो उन्हें अरब पार्टियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

स्पीकर पद पर कब्जे की जंग

विपक्षी गठबंधन की पहली रणनीति संसद के मौजूदा स्पीकर आमिर ओहाना को उनके पद से हटाने की है। विपक्ष संसद के कामकाज पर नियंत्रण चाहता है, ताकि 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग के गठन जैसे अहम प्रस्ताव पास कराए जा सकें।

हालांकि, नए स्पीकर के नाम पर विपक्ष में अभी सहमति नहीं बनी है। एक बार नया स्पीकर चुने जाने के बाद उसे हटाना बेहद कठिन होता है। स्पीकर को हटाने के लिए 90 सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ती है।

क्या दोबारा होंगे चुनाव?

अगर नेतन्याहू और आइजेनकोट दोनों ही 61 का जादुई आंकड़ा जुटाने में विफल रहते हैं, तो देश में एक बार फिर चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग अब सभी राजनीतिक दलों के प्रतनिधियों से मुलाकात कर यह तय करेंगे कि सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए।

बता दें कि इजराइल में 27 अक्टूबर को हुए चुनावों में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया है। 120 सीटों वाली संसद में सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 61 सीटों का है। हालिया चुनावों में नेतन्याहू के समर्थक गठबंधन को 53, विपक्षी नेता आइजेनकोट के गुट को 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें हासिल हुई हैं।

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