कौन है मोजतबा खामेनेई: ईरान की कमान मिलने के बाद क्या है प्लान? कट्टरपंथियों से गहरा नाता
ईरान में मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है, जिससे ईरान में वंशानुगत शासन की वापसी हुई है।
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ईरान की कमान मिलने के बाद क्या है खामेनेई मोजतबा का प्लान(फाइल फोटो)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 1979 में लाखों ईरानियों ने सड़कों पर उतरकर शाह की सत्ता का अंत किया था। उस क्रांति का मुख्य उद्देश्य राजशाही और वंशानुगत शासन को खत्म करना था। लेकिन अब वही ईरान एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाया गया है। यह फैसला 88 सदस्यीय एक्सपर्ट्स असेंबली ने लिया है, जिसने इस्लामिक रिपब्लिक को वास्तव में एक राजवंश में बदल दिया है।
अमेरिका-इजरायल हमले में पिता की मौत
अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। यह हमला 28 फरवरी 2026 को हुआ, जिसमें तेहरान में उनके कंपाउंड को निशाना बनाया गया। राज्य मीडिया के अनुसार, इस हमले में खामेनेई की बेटी, पोता, बहू और दामाद भी मारे गए।
कुछ दिनों बाद मोजतबा की मां भी घायलों में शामिल होकर चल बसीं। यह हमला वर्तमान युद्ध की शुरुआत था, जो अब पूरे मिडिल ईस्ट में फैल चुका है।
कौन है मोजतबा खामेनेई?
मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में हुआ। उन्होंने धार्मिक शिक्षा प्राप्त की, लेकिन कभी मुज्तहिद की रैंक नहीं हासिल की, जो कई रेजीम समर्थकों के अनुसार सुप्रीम लीडर के लिए जरूरी मानी जाती है। वे पूर्व संसद स्पीकर और खामेनेई के विश्वसनीय सहयोगी गोलाम हद्दाद अदेल की बेटी जहरा से शादी की हैं।
मोजतबा ने सालों तक कम प्रोफाइल रखा, लेकिन पिता के सिस्टम में छिपकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और आर्थिक नेटवर्क्स से गहरे संबंध बनाए।
राजनीतिक विवादों से पुराना रिश्ता
2005 के राष्ट्रपति चुनाव में मोजतबा ने कथित रूप से आईआरजीसी के नेटवर्क का इस्तेमाल कर महमूद अहमदीनेजाद को सपोर्ट किया, जो तब तेहरान के मेयर थे और अकबर हाशेमी रफसंजानी के खिलाफ थे। 2009 में अहमदीनेजाद की पुनर्निर्वाचन के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन हुए, जिन्हें क्रूरता से कुचल दिया गया।
2019 में अमेरिका ने उन्हें सैंक्शंस लगाए, आरोप लगाया कि वे आईआरजीसी कमांडर के साथ मिलकर पिता की क्षेत्रीय अस्थिरता और घरेलू दमन की नीतियों को आगे बढ़ा रहे थे।
सुप्रीम लीडर के रूप में नियुक्ति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
एक्सपर्ट्स असेंबली ने मोजतबा को निर्णायक वोट से चुना। आईआरजीसी ने भी उनकी निष्ठा की घोषणा की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि मोजतबा की नियुक्ति अस्वीकार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना उनकी मंजूरी के कोई नया लीडर लंबे समय तक नहीं टिकेगा। इजरायल ने भी नए लीडर को निशाना बनाने की धमकी दी है। यह फैसला युद्ध के बीच हुआ, जब ईरान भारी सैन्य दबाव में है।
भविष्य के लिए संकेतमोजतबा के पास कोई बड़ा प्रशासनिक अनुभव नहीं है। न कभी किसी बड़े संगठन का नेतृत्व किया, न ही सार्वजनिक रूप से कई बयान दिए। उनकी विश्वदृष्टि पिता की छाया में बनी है।
कार्नेगी मिडिल ईस्ट सेंटर की निदेशक महा यह्या ने कहा कि यह नियुक्ति रेजीम की निरंतरता का संकेत है और अमेरिका-इजरायल के सैन्य दबाव से नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। यह फैसला ईरान में लोकतंत्र की उम्मीदों को तोड़ता है और हार्डलाइनर्स की मजबूती दिखाता है। युद्ध के इस दौर में मोजतबा अब आईआरजीसी और उनके सहयोगियों के साथ मिलकर पिता की विरासत को आगे बढ़ाएंगे।
