दोहा, एएफपी। अफगानिस्तान से जुड़े विरोधी धड़ों के बीच दोहा में रविवार को बैठक होगी। इस बैठक के दौरान कतर और जर्मनी की मध्यस्थता में नये दौर की बातचीत होगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका तीन महीने के अंदर तालिबान के साथ शांति समझौते की तलाश में है। मॉस्को में इस तरह की पहली बैठक को सफल बताया गया था, लेकिन महिला अधिकार, विदेशी सैन्य वापसी, अलकायदा और तालिबान के साथ सत्ता साझेदारी जैसे कई संवेदनशील मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। अफगानिस्तान मुद्दे के दो विशेषज्ञों ने बातचीत को लेकर अपनी आशाएं जाहिर कीं।

जर्मनी और कतर को उम्मीद है कि यह बैठक प्रमुख हितधारकों के बीच विश्वास-निर्माण में योगदान देगा, जो अफगानिस्तान के लोगों और समाज के व्यापक स्पेक्ट्रम का प्रतिनिधित्व करता है, और इस प्रकार अफगानिस्तान और व्यापक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देता है।

विल्सन सेंटर में एशिया कार्यक्रम के उप निदेशक माइकल कुगेलमैन ने कहा, 'हम बड़े, अस्पष्ट बयान की उम्मीद कर रहे हैं जिसमें कुछ वृहद एवं हानिरहित सिद्धांत पेश किए जाएं और आगे बढ़ने की जरूरत पर सहमति जताई जाए।'

उन्होंने कहा, 'चूंकि यह बातचीत शुरुआती चरण में है, मैं किसी बड़ी सफलता की उम्मीद नहीं करता। फिर भी, यह इस बातचीत के महत्व को कम नहीं करता है।' दूसरे विशेषज्ञ कोलिन क्लार्क ने कहा कि रविवार की बातचीत में काबुल सरकार का कोई प्रतिनिधि आधिकारिक रूप से नहीं बल्कि केवल व्यक्तिगत रूप से शामिल होगा यानी अफगान नेताओं को हाशिये पर रखा जा रहा है।

बता दें, यह बातचीत ऐसे समय होगी जब एक सप्ताह पहले दोहा में ही अमेरिका और तालिबान के बीच सीधी बातचीत हुई थी।अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने तालिबान से समझौते पर कहा है कि दोनों पक्षों के बीच एक सितंबर तक समझौता हो जाने की उम्मीद जताई थी। उन्होंने यह भी कहा था कि अंतिम समझौते में अफगान सरकार के साथ बातचीत और स्थायी संघर्षविराम को भी शामिल किया जाएगा। हालांकि तालिबान अभी तक अफगानिस्तान की सरकार से किसी तरह की बातचीत का प्रस्ताव ठुकराता रहा है।

एक सितंबर की समय सीमा क्यों ?
अफगानिस्तान में 28 सितंबर को राष्ट्रपति चुनाव होना है। अमेरिका के अलावा अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी की भी कोशिश है कि इस चुनाव से पहले तालिबान के साथ शांति समझौता संपन्न हो जाए।

Posted By: Shashank Pandey

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