खामेनेई की मौत, चर्चा में बेटे मोजतबा का नाम... फिर भी क्यों नहीं बनाया गया सुप्रीम लीडर?
ईरान में आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद सत्ता के शीर्ष पर खालीपन पैदा हो गया। अंतरिम ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों में मौत की खबर के बाद देश में सत्ता के शीर्ष स्तर पर बड़ा खालीपन पैदा हो गया था। इस घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह था कि ईरान का अगला सुप्रीम लीडर कौन होगा?
हालांकि, ईरान ने अस्थायी तौर पर अलिरेजा अराफी को सुप्रीम लीडर बनाया गया है। इसी बीच उनके दूसरे बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम भी काफी ज्यादा चर्चा में है। उन्हें लंबे समय से ईरान की सत्ता व्यवस्था के अंदर प्रभावशाली लेकिन पर्दे के पीछे काम करने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता रहा है।
वरिष्ठ नेता अली लारिजानी ने संकेत दिया था कि सत्ता की निरंतरता बनाए रखने के लिए अंतरिम नेतृत्व व्यवस्था लागू की जाएगी। उनके अनुसार राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के एक धर्मगुरु की परिषद अस्थायी रूप से जिम्मेदारी संभालेगी, जब तक नए सुप्रीम लीडर का चयन नहीं हो जाता।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई?
मोजतबा खामेनेई, 56 वर्ष के हैं और उन्हें ईरान की सत्ता व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली लेकिन कम दिखाई देने वाले चेहरों में गिना जाता है। उनका जन्म 1969 में मशहद में हुआ था। उनके पिता उस समय शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन के विरोध में सक्रिय थे और कई बार गिरफ्तार भी किए गए थे।
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद परिवार की स्थिति बदली और वे तेहरान आ गए। मोजतबा ने अलावी हाई स्कूल में पढ़ाई की, जिसे सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों का स्कूल माना जाता है। इसके बाद उन्होंने तेहरान और कोम में धार्मिक शिक्षा ली।
उन्होंने प्रमुख रूढ़िवादी धर्मगुरुओं के साथ अध्ययन किया। हालांकि वे एक मध्यम स्तर के धर्मगुरु हैं और आयतुल्लाह नहीं हैं, फिर भी उन्हें सुप्रीम लीडर के कार्यालय में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला माना जाता है।
सुरक्षा तंत्र से मजबूत संबंध
मोजतबा खामेनेई के प्रभाव की एक बड़ी वजह उनके इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से करीबी रिश्ते बताए जाते हैं। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान हबीब बटालियन में सेवा दी थी।
कहा जाता है कि उन्होंने सुरक्षा और खुफिया तंत्र में ऊंचे पदों पर पहुंचे कई अधिकारियों से करीबी संबंध बनाए। उन पर चुनावी राजनीति और सुरक्षा कार्रवाई में भूमिका निभाने के आरोप भी लगते रहे हैं।
2019 में अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध लगाया था। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा था कि अली खामेनेई ने अपनी कुछ शक्तियां अपने बेटे को सौंपी थीं, हालांकि मोजतबा के पास कोई निर्वाचित पद नहीं था।
सुप्रीम लीडर बनने की प्रक्रिया
ईरान के संविधान के मुताबिक सुप्रीम लीडर बनने के लिए वरिष्ठ धर्मगुरु होना और धार्मिक-राजनीतिक योग्यता जरूरी है। मोजतबा फिलहाल आयतुल्लाह नहीं हैं, इसलिए उनके सामने संवैधानिक चुनौती है। ईरान की व्यवस्था वंशानुगत शासन के खिलाफ क्रांति से बनी थी, इसलिए पिता से बेटे को सत्ता मिलना संवेदनशील मुद्दा माना जाता है।
नए सुप्रीम लीडर का चयन 88 सदस्यीय असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करती है। यह निकाय योग्य धर्मगुरुओं का आकलन कर किसी एक को नियुक्त करता है। जरूरत पड़ने पर अंतरिम नेतृत्व व्यवस्था लागू की जा सकती है, ताकि शासन व्यवस्था जारी रहे।
