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इजरायल ने नहीं मानी ट्रंप की बात, हमले के बाद ईरान पर दागी ताबड़तोड़ मिसाइलें

Published: Mon, 08 Jun 2026 07:52 AM (IST)

इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए ईरान के मध्य और पश्चिमी इलाकों में स्थित सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया है।

इजरायल ने ईरान पर बड़ा जवाबी हमला किया है। (फोटो: रॉयटर्स)

इजरायल ने ईरान पर बड़ा जवाबी हमला किया है। (फोटो: रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, यरुसलम। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की सख्त हिदायत को अनसुना करते हुए इजरायल ने ईरान पर बड़ा जवाबी हमला किया है। इजरायली वायुसेना ने ईरान के मध्य और पश्चिमी इलाकों में स्थित सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। इस कार्रवाई के बाद से मध्य पूर्व में एक बार फिर महायुद्ध छिड़ने का खतरा मंडराने लगा है।

इजरायली सेना ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस एयरस्ट्राइक की जानकारी दी। एपी न्यूज एजेंसी के हवाले से ईरानी सरकारी टीवी ने भी पुष्टि की है कि राजधानी तेहरान के अलावा इस्फहान और तबरीज जैसे शहरों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं।

हमले की गंभीरता को देखते हुए ईरान ने आनन-फानन में तेहरान स्थित इमाम खुमैनी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास का एयरस्पेस पूरी तरह से बंद कर दिया है।

नेतन्याहू ने नहीं मानी ट्रंप की बात

एक्सियोस की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन किया था। ट्रंप ने उन्हें दो टूक शब्दों में कहा था कि वे ईरान पर किसी भी तरह की जवाबी सैन्य कार्रवाई करने से बचें। हालांकि, इजरायल ने अपने सबसे बड़े सहयोगी देश के राष्ट्रपति की इस चेतावनी को दरकिनार कर दिया।

फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि इजरायली प्रधानमंत्री के पास वाशिंगटन द्वारा ईरान के साथ किए गए किसी भी समझौते को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा, और इस बात पर जोर दिया कि अंतिम कार्यकारी निर्णय उन्हीं के हाथ में हैं।

इस ताजा हमले की जड़ें कुछ दिन पहले हुई घटनाओं से जुड़ी हैं। 8 अप्रैल को हुए सीजफायर के बाद ईरान ने अचानक इजरायल पर मिसाइलों की बारिश कर दी थी। ईरान का तर्क था कि सीजफायर लागू होने के बावजूद इजरायल बाज नहीं आ रहा था और लेबनान पर लगातार हमले कर रहा था।

ईरान के मिसाइल हमले से ठीक एक दिन पहले ही इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर बिना किसी पूर्व चेतावनी के बमबारी की थी, जिसके बाद ईरान ने इस कार्रवाई की धमकी दी थी।

स्थायी शांति की उम्मीदों को लगा बड़ा झटका

ईरान और अमेरिका के बीच किसी स्थायी सीजफायर तक पहुंचने की कोशिशें पहले से ही डगमगा रही थीं। अब इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए इस हमले-दर-हमले के सिलसिले ने शांति की बची-खुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। जानकारों का मानना है कि अगर यह तनाव जल्द नहीं थमा, तो यह एक भयानक और बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने बेरूत हमले के लिए इज़राइल को हरी झंडी नहीं दी थी। अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ने नेतन्याहू के साथ टेलीफोन पर बातचीत का इस्तेमाल यह तर्क देने के लिए किया कि मौजूदा समय तनाव को और बढ़ाने का नहीं है। अधिकारी ने कहा, "उन्होंने नेतन्याहू से रुकने के लिए कहा क्योंकि हम एक डील के मामले में कुछ अच्छा करने के करीब हैं।"

अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ईरान के साथ समझौता करने का अभी भी एक अच्छा मौका है और वे ऐसी किसी भी कार्रवाई को रोकना चाहते हैं जो उन कूटनीतिक कोशिशों को पटरी से उतार सकती है।

अधिकारी ने बताया कि बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने शुरू में विरोध किया, लेकिन आखिरकार वे पीछे हटने और तुरंत जवाबी कार्रवाई न करने पर आंशिक रूप से सहमत हो गए। बताया जा रहा है कि यह बातचीत पिछले हफ्ते दोनों नेताओं के बीच हुई तनावपूर्ण चर्चा की तुलना में काफी कम टकराव वाली थी।

ईरान के साथ डील के करीब

वरिष्ठ अधिकारी ने आगे कहा कि रविवार की चर्चा के दौरान ट्रंप ने अपनी आवाज ऊंची नहीं की। उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि राष्ट्रपति को थोड़ा और समय मिल गया है। वे इस बात पर काफी अडिग हैं कि हम ईरान के साथ डील के करीब हैं। मुझे नहीं लगता कि इजरायल की ओर से कोई हमला तुरंत होने वाला है।"

हालांकि ट्रंप कूटनीतिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन हाल के महीनों की तुलना में वे अब ईरान के साथ समझौते के करीब होने को लेकर कम निश्चित लग रहे थे। अप्रैल की शुरुआत में जब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ बातचीत के पहले दौर का नेतृत्व किया था, तब से ट्रंप ने सफलता की संभावनाओं को लेकर बार-बार उम्मीद जताई थी।

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