क्या फिर दोहराएगा 1973 का 'योम किप्पुर युद्ध'? ईरान से टकराव के बीच इजरायल में हाई अलर्ट, 48 घंटे का सैन्य अभ्यास शुरू
इज़रायल ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव और 1973 के योम किप्पुर युद्ध जैसी आशंकाओं के बीच 48 घंटे का बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया है।

इजरायल ने ईरान तनाव के बीच बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया

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डिजिटल डेस्क, तेहरान। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और 1973 के 'योम किप्पुर युद्ध' जैसी बड़ी मुठभेड़ की आशंकाओं के बीच इजरायल ने अचानक हमलों और सीमा पार घुसपैठ से निपटने के लिए 48 घंटे का बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। इस अभ्यास में सेना के कई डिवीजन और वायु सेना की इकाइयां शामिल हैं।
फॉक्स न्यूज के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य कई मोर्चों पर संभावित हमलों के खिलाफ इजरायल की तैयारियों को और मजबूत करना है। सैन्य योजनाकार 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले और पिछली खुफिया विफलताओं से सबक लेते हुए अपनी रणनीति बना रहे हैं।
इजरायल ने बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया
यह अभ्यास उस समय हो रहा है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है। हाल ही में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल अभ्यास किए हैं, और इसके कुछ दिनों बाद 27 अक्टूबर को इज़राइल में राष्ट्रीय चुनाव भी होने हैं।
इस अभ्यास में इजरायली सेना की उत्तरी कमान का 210वां डिवीजन, वेस्ट बैंक डिवीजन, और सेंट्रल कमान के 98वें और 96वें डिवीजन के साथ-साथ इज़राइली वायु सेना भी शामिल है।
इन युद्धाभ्यासों का मकसद अचानक होने वाले हमलों, जमीन और हवा के रास्ते सीमा पार से घुसपैठ, और कई मोर्चों से पैदा होने वाले खतरों के खिलाफ सेना की प्रतिक्रिया क्षमता को परखना है।
IDF के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने चेतावनी दी है कि कई मोर्चों पर सुरक्षा चिंताओं के चलते संघर्ष के और बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।
अचानक हमलों और घुसपैठ से निपटने की तैयारी
सेना की सेंट्रल कमान के दौरे के दौरान जमीर ने कहा, 'सभी मोर्चों से मिल रही कई चेतावनियों और मौजूदा दौर की संवेदनशीलता को देखते हुए, संघर्ष के और बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।'
उन्होंने आगे कहा कि इजरायली सेना ने अपनी तैयारियों और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई इलाकों में तैनाती बढ़ा दी है। ये सैन्य अभ्यास ऐसे समय में हो रहे हैं, जब कुछ दिन पहले ही ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' ने कथित तौर पर बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था। इससे तेहरान और यरुशलम के बीच तनाव बढ़ने की चिंताएं और गहरी हो गई हैं।
27 अक्टूबर को होने वाले चुनावों से पहले इज़रायल की सैन्य तैयारियों पर भी कड़ी नज़र रखी जा रही है। सुरक्षा अधिकारियों को डर है कि इस संवेदनशील राजनीतिक दौर का फायदा क्षेत्रीय दुश्मन उठा सकते हैं।
1973 का 'योम किप्पुर युद्ध' आज भी इज़रायल को क्यों डराता है? 1973 के 'योम किप्पुर युद्ध' से इसकी तुलना इसलिए की जा रही है क्योंकि सैन्य अभ्यास और सैनिकों की आवाजाही का इस्तेमाल असल हमले की तैयारियों को छिपाने के लिए किया जा सकता है।
1973 योम किप्पुर युद्ध से सीखे सबक शामिल
6 अक्टूबर 1973 को मिस्र और सीरिया ने इज़रायल पर दो मोर्चों से एक साथ हमला किया था; मिस्र की सेना ने स्वेज नहर पार की, जबकि सीरियाई सेना गोलान हाइट्स की ओर आगे बढ़ी।
इजरायली खुफिया एजेंसियों को असामान्य सैन्य गतिविधियों के संकेत मिले थे, लेकिन वे हमले की संभावना और उसके समय का सही अंदाजा नहीं लगा पाईं।
इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक डॉ. एहुद एइलम ने फॉक्स न्यूज़ को बताया कि युद्ध से पहले मिस्र और सीरिया ने एक बड़ा सैन्य अभ्यास किया था, जिससे उन्हें अपनी सैन्य तैयारियों को छिपाने में मदद मिली।
उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा टकराव में भी गलत आकलन का वैसा ही जोखिम है, क्योंकि इजरायल और ईरान एक-दूसरे की सैन्य गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहे हैं और दोनों को यही शक है कि कहीं दूसरा पक्ष पहले हमला न कर दे।
1973 में, चेतावनी के संकेतों को सही ढंग से न समझ पाने के कारण, युद्ध की शुरुआत में ही इज़रायल बहुत कमजोर स्थिति में आ गया था।
मौजूदा सैन्य अभ्यासों का मकसद अचानक होने वाले हमलों और घुसपैठ के खिलाफ अपनी तैयारी को बेहतर बनाना है। इसमें 1973 के युद्ध और 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले से मिले सबक को भी शामिल किया गया है।
