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इजरायल में सरकार गठन पर सस्पेंस, नेतन्याहू विरोधी खेमा अरब पार्टियों संग बना रहा रणनीति

Published: Fri, 30 Oct 2026 10:44 PM (IST)

इजरायल में मतगणना के बाद नेतन्याहू के गठबंधन को सर्वाधिक सीटें मिलीं, पर बहुमत नहीं। अब मध्यमार्गी और अरब पार्टियां मिलकर सरकार बनाने की कोशिश कर रही हैं।

नेतन्याहू गठबंधन को सर्वाधिक 53 सीटें मिलीं, बहुमत नहीं

नेतन्याहू गठबंधन को सर्वाधिक 53 सीटें मिलीं, बहुमत नहीं

HighLights

  1. नेतन्याहू गठबंधन को सर्वाधिक 53 सीटें मिलीं, बहुमत नहीं

  2. मध्यमार्गी और अरब पार्टियां सरकार बनाने को प्रयासरत

  3. आइसेनकोट नई सरकार से पहले स्पीकर चुनाव चाहते हैं

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। इजरायल में मतगणना पूरी होने के बाद सामने आई विजयी गठबंधनों की स्थिति से साफ हो गया है कि सबसे लंबे समय से प्रधानमंत्री पद पर काबिज बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को सर्वाधिक 53 सीटें मिली हैं लेकिन नतीजा उनके खिलाफ गया है। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी की सीटें कम हुई हैं।

नेतन्याहू की नीतियों के विरोध में चुनाव लड़े पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट की याशर पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं लेकिन वह बहुमत के आंकड़े 61 को छूने के लिए 19 सीटों पर जीती अरब पार्टियों से बात कर रहे हैं।

जबकि नेतन्याहू अरब पार्टियों को देश के लिए घातक बताते हुए उन्हें सत्ता से दूर रखने की बात कहते हुए आइसेनकोट पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

नेतन्याहू गठबंधन को सर्वाधिक 53 सीटें मिलीं, बहुमत नहीं

नेतन्याहू विरोधी खेमे में चल रही बातचीत के बीच पूर्व प्रधानमंत्री याइर लैपिड ने देशवासियों से संयम बरतने की अपील की है। एक्स पर पोस्ट संदेश में लैपिड ने कहा, अगर आप जानना चाहते हैं कि पर्दे के पीछे कुछ चल रहा है तो हमारा जवाब है- हां। उन्होंने कहा, चुनाव में जीत, जीत होती है...और यह सच है कि अब नेतन्याहू विरोधी बहुमत में हैं।

एपी के अनुसार नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन के अरब पार्टियों से सहयोग की कोई संभावना नहीं है, ऐसे में आइसेनकोट के नेतृत्व वाले मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के बीच समझौते की संभावना बचती है, अब उसी के लिए बात हो रही है।

चूंकि दोनों ही गठबंधन ही नेतन्याहू के खिलाफ चुनाव लड़े हैं, ऐसे में उन्हें सत्ता से दूर करने के लिए मध्यमार्गी गठबंधन और अरब दल समझौता कर सकते हैं।

2021 में लैपिड और नाफ्ताली बेनेट की सरकारों को बनवाने के लिए उन्होंने ऐसा समझौता किया भी था। दोनों गठबंधन जानते हैं कि अगर वे नहीं मिले तो अगले चुनाव तक कार्यवाहक सरकार का नेतृत्व करते हुए नेतन्याहू सत्ता में बने रह सकते हैं।

आइसेनकोट नई सरकार से पहले स्पीकर चुनाव चाहते हैं

विश्लेषकों के अनुसार नेतन्याहू मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के संभावित गठबंधन की संभावना को खत्म करने के लिए ही अरब पार्टियों को लगातार निशाना बना रहे हैं। नेतन्याहू ने चुनाव में विदेशी धन का इस्तेमाल होने की बात कही है। इस आरोप को बल देने वाला कोई सुबूत नहीं है लेकिन जांच के आदेश दिए जा चुके हैं।

रायटर के अनुसार निर्वाचित सदस्य नीसेट में 10 नवंबर को शपथ लेंगे। इसी के साथ नई संसद का गठन होगा लेकिन आइसेनकोट के नेतृत्व वाला गठबंधन इसी दौरान ने नए स्पीकर का चुनाव करना चाहता है।

यह चुनाव नीसेट में बहुमत के आधार पर होगा और इसी से नई सरकार के गठन की नींव पड़ जाएगी। आइसेनकोट नई सरकार बनने से पहले नए स्पीकर का चुनाव चाहते हैं।

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