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ईरान का 'आर्क डिफेंस': इन 7 द्वीपों के समूह से दुनिया की सांसें अटकाता है तेहरान; अमेरिका भी इसके आगे बेबस

Published: Sun, 05 Apr 2026 11:09 AM (IST)

ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सात द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात और तेल मार्गों को नियंत्रित करने में ...और पढ़ें

HighLights

  1. 7 द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात नियंत्रित करते हैं।

  2. इन्हें "न डूबने वाले विमान वाहक" के रूप में जाना जाता है।

  3. ईरान ने इन द्वीपों को मिसाइलों और रडार से लैस किया है।

डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। नई दिल्ली: ईरान के दक्षिणी तट पर मौजूद सात द्वीपों का नेटवर्क अब समुद्री यातायात को नियंत्रित करने और तेल मार्गों को प्रभावित करने की उसकी क्षमता में एक अहम हथियार बन गया है। ये तेल मार्ग मौजूदा संघर्ष में बेहद महत्वपूर्ण हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है।

न डूबने वाले विमान वाहक है ये 7 द्वीप

उसके आसपास स्थित ये भारी किले बंद 7 द्वीप "न डूबने वाले विमान वाहक" के रूप में काम करते हैं। ये द्वीप तेहरान को वैश्विक तेल शिपमेंट की निगरानी करने, उन्हें नियंत्रित करने और संभावित रूप से बाधित करने में सक्षम बनाते हैं। हालांकि ऐसी अटकलें हैं कि अमेरिकी जमीनी सैनिक ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की तैयारी कर रहे हैं।

जो एक प्रमुख ईंधन केंद्र है और तेहरान के 90 प्रतिशत तेल निर्यात को संभालता है। लेकिन इस युद्ध में कुछ अन्य द्वीप भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। जिन्हें ईरान "न डूबने वाले विमान वाहक" कहते हैं। तेहरान ने अपने द्वीपों के नेटवर्क को रडार सिस्टम, मिसाइल बैटरियों, हवाई पट्टियों, ईंधन डिपो और पनडुब्बियों के साथ तेज-हमला करने वाली नावों के लिए नौसैनिक लॉन्च प्वाइंट से लैस किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन सात द्वीपों में अबू मूसा, ग्रेटर तुंब, लेसर तुंब, हेंगम, केशम, लारक और होरमुज़ शामिल है। यह मिलकर ईरान के लिए एक 'आर्क डिफेंस' बनाते हैं। जहां से लगभग सभी गतिविधियों की निगरानी करने और संभावित रूप से उन्हें नियंत्रित करने की क्षमता पैदा होती है।

जहाजों को द्वीपों के बीच से गुजरना पड़ता है

इसके साथ ही एक और भौगोलिक स्थिति इन द्वीपों के महत्व को बढ़ाता है। वह है इन द्वीपों के बीच में मौजूद निर्धारित चैनल जहां से जहाजों को गुजरना पड़ता है। वैसे तो सबसे संकरा बिंदु लगभग 21 मील तक सिकुड़ जाता है, लेकिन जहाजों को द्वीपों के बीच दो निर्धारित चैनलों से होकर गुजरना पड़ता है, जिनमें से हर एक की चौड़ाई सिर्फ दो मील है। ये रास्ते ईरान के कब्जे वाले क्षेत्र के करीब से गुजरते हैं। इसी का फायदा ईरान उठाता आ रहा है।

इसलिए ईरान ने इन द्वीपों का उपयोग तेजी से बढ़ाया है। रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध के दौरान जहाजों को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े मध्यस्थों के माध्यम से मंजूरी लेनी पड़ती है, और कुछ मामलों में सुरक्षित मार्ग के लिए उन्हें बड़ी रकम भी चुकानी पड़ सकती है। इन द्वीपों का महत्व केवल निगरानी तक ही सीमित नहीं है।

ईरान इन द्वीपों को मिसाइलों और ड्रोन के लिए लॉन्च प्वाइंट के रूप में भी उपयोग करता हैं। उनका स्थिर स्वरूप, यानी उनका न डूबना। इस बात का संकेत है कि उन्हें निष्क्रिय करने के लिए सीधे सैन्य कार्रवाई की आवश्यकता होगी। इस स्थिति ने इन द्वीपों को रणनीतिक योजना के केंद्र में खड़ा कर दिया है।

 

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