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ईरान ने जेडी वेंस के दावे को किया खारिज, कहा- तेहरान ने परमाणु निरीक्षण की नहीं दी अनुमति

Published: Tue, 23 Jun 2026 05:26 AM (IST)

ईरान ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान ने ...और पढ़ें

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई

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डिजिटल डेस्क, तेहरान। ईरान ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को देश में प्रवेश की अनुमति देने पर सहमति जताई है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ ईरान का सहयोग केवल मौजूदा सुरक्षा समझौतों और देश के कानूनी ढांचे के तहत ही जारी रहेगा।

IAEA के साथ सहयोग जारी रहेगा

सोमवार को ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA से बातचीत में बकाई ने कहा कि IAEA के साथ ईरान की बातचीत और सहयोग पूर्व निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार जारी रहेगा।

उन्होंने कहा, "सुरक्षा समझौतों के तहत ईरान की जो जिम्मेदारियां हैं, उनके अनुसार एजेंसी के साथ हमारा सहयोग जारी रहेगा। यह संसद द्वारा पारित कानूनों और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के निर्णयों के अनुरूप होगा।"

स्विट्जरलैंड में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता

बकाई का यह बयान स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई तकनीकी वार्ता के बाद आया है। वार्ता के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया था कि बातचीत में सकारात्मक प्रगति हुई है और ईरान ने परमाणु निरीक्षकों को देश में प्रवेश देने पर सहमति जताई है।

समझौते की मजबूत नींव रखी गई: वेंस

स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में पत्रकारों से बातचीत करते हुए वेंस ने वार्ता के पहले दिन को बहुत अच्छा बताया।

उन्होंने कहा, "हमने एक सफल अंतिम समझौते के लिए मजबूत नींव रखी है। अंतिम समझौता एक घर की तरह है। हमने अभी घर नहीं बनाया है, लेकिन अच्छी शुरुआत जरूर कर दी है।" वेंस ने यह भी कहा कि निरीक्षण तंत्र को और मजबूत किया जाएगा ताकि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके।

परमाणु कार्यक्रम पर कोई चर्चा नहीं हुई: ईरान का दावा

हालांकि, IRNA के अनुसार वार्ता से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बातचीत के दौरान ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई चर्चा नहीं की और न ही किसी नए परमाणु प्रतिबद्धता पर सहमति दी।

सूत्रों के मुताबिक, भविष्य में परमाणु मुद्दों पर किसी भी संभावित वार्ता का आधार 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) का पैराग्राफ-13 होगा, जिसकी शर्तों के लागू होने के बाद ही आगे की बातचीत संभव होगी।

वाशिंगटन और तेहरान के बयानों में स्पष्ट अंतर यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विवादों के समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन किसी व्यापक समझौते तक पहुंचने का रास्ता अभी आसान नहीं दिख रहा है।