बगदाद, रायटर। ईरान अपने क्षेत्रीय दुश्मनों को डराने के लिए इराक में मौजूद शिया लड़ाकों को बैलिस्टिक मिसाइल दे रहा है। यही नहीं, वह उन्हें मिसाइल विकसित करने में भी मदद कर रहा है। ईरान की यह आक्रामक मिसाइल नीति सामने आने के बाद अमेरिका के साथ उसका तनाव बढ़ने की आशंका है। वहीं, उसका यह कदम फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के लिए शर्मिदगी का सबब बन सकता है, जो अमेरिका के बाहर होने के बाद भी परमाणु समझौता बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिका और इजरायल को डराने के लिए ये मिसाइलें भेजी 

सूत्रों के मुताबिक ईरान ने जेलजाल, फतेह-110 और जुल्फिकार नामक दस मिसाइलें इराक भेजी हैं। इनकी रेंज 200 से 700 किलोमीटर बताई जा रही है। इन्हें यदि दक्षिणी या पश्चिमी इराक में तैनात किया जाए तो सऊदी अरब की राजधानी रियाद और इजरायल का तेलअवीव शहर उसकी जद में होगा। पश्चिमी देशों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सीरिया में ईरानी सैनिकों पर हुए हमले के बाद अमेरिका और इजरायल को डराने के लिए ईरान ने ये मिसाइलें भेजी हैं।

उल्लेखनीय है कि ईरान कहता रहा है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम अपनी रक्षा के लिए है। ताजा कदम पर ईरान के अधिकारियों ने टिप्पणी नहीं की है। इराक सरकार और सेना ने भी इस पर कोई बयान नहीं दिया। ईरान पर पहले भी सीरिया, यमन में हाउती विद्रोहियों और लेबनान में हिजबुल्ला को मिसाइल देने के आरोप लग चुके हैं।

परमाणु समझौते पर बातचीत का फ्रांस का प्रस्ताव ठुकराया

ईरान के विदेश मंत्रालय ने परमाणु करार पर बातचीत का फ्रांस का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। उसका कहना है कि फ्रांस दिखावा कर रहा है और उसके कुछ सहयोगी अतिरिक्त दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

 

Posted By: Arun Kumar Singh