घातक हुआ ईरान, यूएई-कतर, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सेना के बेस पर मिसाइल अटैक
ईरान के आईआरजीसी ने मध्य पूर्व में अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों पर हमले में लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलों के साथ-साथ विनाशकारी ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
HighLights
आईआरजीसी ने 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' के तहत हमला किया
अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया
मिसाइलों और ड्रोनों का उपयोग कर कई देशों पर हमला
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने शुक्रवार तड़के सुबह ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 की 83वीं लहर के लॉन्च की, जिसके तहत पूरे क्षेत्र में स्थित अमेरिका और इजरायल के प्रमुख सैन्य ठिकानों को उन्नत मिसाइलों और ड्रोनों से निशाना बनाया गया।
ईरानी समाचार एजेंसियों द्वारा जारी एक बयान में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बताया कि इन हमलों में लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलों के साथ-साथ विनाशकारी लोइटरिंग ड्रोन भी शामिल थे।
जो इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित ठिकानों को निशाना बनाया। बहरीन में स्थित अमेरिकी पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली का एक रखरखाव केंद्र भी इन लक्ष्यों में शामिल था।
कहां- कहां हुआ हमला
इन लक्ष्यों में अशदोद में मौजूद स्टोरेज टैंक और तेल डिपो, मोदियिन बस्ती में सैन्य कर्मियों का एक ठिकाना, और इस क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सेना का एक सूचना आदान-प्रदान केंद्र शामिल थे।
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि आईआरजीसी ने अल-धफरा और अल-उदेरी स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमला किया; इसके साथ ही, अली अल-सलेम एयर बेस पर परिवहन विमानों और ड्रोनों के रखरखाव और भंडारण के लिए बने हैंगरों को भी निशाना बनाया गया।
पैट्रियट मिसाइल प्रणाली के हैंगर पर हमला
इन लक्ष्यों के अलावा, ईरान द्वारा हमला किए गए अन्य ठिकानों में अमेरिकी सेना के जेट और लड़ाकू विमानों के ईंधन टैंक, तथा शेख ईसा बेस पर पैट्रियट मिसाइल प्रणाली के रखरखाव और मरम्मत के लिए बने हैंगर शामिल थे।
आईआरजीसी के बयान के अनुसार, इन हमलों में लंबी और मध्यम दूरी की प्रणालियों, ठोस और तरल ईंधन वाली मिसाइलों, सटीक-हमला और मल्टी-वॉरहेड क्षमताओं, तथा आत्मघाती और लोइटरिंग ड्रोनों के मिश्रण का उपयोग किया गया।
