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ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर, मोजतबा खामनेई संभालेंगे अयातुल्ला अली की विरासत

Published: Mon, 09 Mar 2026 06:00 AM (IST)

अमेरिका और इजरायली हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद उनके बेटे मेजेतबा खामनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है।

ईरान ने मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया। (रॉयटर्स)

ईरान ने मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया। (रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायली हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद देश में सत्ता संकट के बीच नए सुप्रीम लीडर को चुन लिया है। अयातुल्ला अली खामनेई के बेटे मेजेतबा खामनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है।

खामनेई के बेटे मोजतबा खामनेई को उत्तराधिकारी की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि पहले की तरह कट्टर समर्थकों का बड़ा आधार अब नहीं बचा है, जिससे नए नेतृत्व के लिए सत्ता को स्थिर रखना कठिन हो सकता है।

आम जनता का समर्थन काफी घटा

1979 की इस्लामी क्रांति के समय लाखों ईरानियों का समर्थन इस व्यवस्था को मिला था, लेकिन भ्रष्टाचार, आर्थिक कुप्रबंधन और दमनकारी नीतियों के कारण पिछले दशकों में आम जनता का समर्थन काफी घट गया है। इसके बावजूद शासन के प्रति वफादार एक मजबूत वर्ग अब भी मौजूद है।

बसीज के सदस्य खामेनेई की राह को आगे बढ़ाएंगे

यह वर्ग मुख्य रूप से बसीज स्वयंसेवी मिलिशिया और सुरक्षा तंत्र से जुड़ा है, जो विरोध प्रदर्शनों को दबाने और व्यवस्था की रक्षा करने में सक्रिय रहता है। बसीज के सदस्य महदी रास्तेगारी जैसे लोग कहते हैं कि वे नए नेता के लिए भी जान देने को तैयार हैं और खामेनेई की राह को आगे बढ़ाएंगे।

विश्लेषकों के अनुसार, यही संगठित नेटवर्क किसी भी बाहरी कोशिश से शासन परिवर्तन को कठिन बना सकता है। हालांकि लगातार युद्ध, आर्थिक गिरावट और बुनियादी ढांचे के नुकसान के कारण व्यवस्था के समर्थकों के बीच भी चिंता बढ़ रही है।

कुछ बसीज सदस्यों का कहना है कि यदि युद्ध और प्रतिबंधों के कारण अर्थव्यवस्था और बिगड़ी, तो ईरान के लिए अपने पारंपरिक समर्थन आधार को बनाए रखना पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो जाएगा।

ईरान में सत्ता परिवर्तन कठिन, लेकिन जरूरी: इजरायली विशेषज्ञ

इजरायल के अमेरिका में पूर्व राजदूत माइकल ओरेन ने कहा है कि ईरान में मौजूदा शासन के रहते सैन्य संघर्ष को पूरी तरह रोक पाना मुश्किल होगा। उनका मानना है कि जब तक ईरान की वर्तमान सत्ता संरचना में बदलाव नहीं होता, तब तक क्षेत्र में तनाव बना रह सकता है।

एक साक्षात्कार में ओरेन ने कहा कि ईरानी नेतृत्व स्वेच्छा से अपनी मूल नीतियों से पीछे हटने की संभावना बहुत कम है। उनके अनुसार मौजूदा शासन की वैचारिक संरचना में जिहादी सोच और क्षेत्रीय वर्चस्व की महत्वाकांक्षा गहराई से जुड़ी हुई है, इसलिए उससे नीतिगत बदलाव की उम्मीद करना कठिन है।

ओरेन ने कहा कि यह मानना लगभग असंभव है कि वर्तमान ईरानी शासन अपना बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम बंद कर देगा या क्षेत्र में सक्रिय सशस्त्र समूहों को समर्थन देना छोड़ देगा। उनके मुताबिक ऐसा करना शासन की पहचान के लिए आत्मघाती कदम जैसा होगा।

(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

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