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हूती विद्रोहियों ने सऊदी के तेल ठिकानों पर किया हमला, यमन में फिर भड़क सकता है युद्ध

Published: Sun, 26 Jul 2026 01:36 PM (IST)

खाड़ी में तनाव बढ़ गया है, जहां ईरान ने यूक्रेन पर कैस्पियन सागर में अपने जहाज पर हमला करने का आरोप लगाया।

हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में तेल ठिकानों पर हमला किया (फोटो-रॉयटर्स)

हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में तेल ठिकानों पर हमला किया (फोटो-रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, रियाद। खाड़ी में तनाव कम होने के बावजूद शनिवार को दो बड़ी घटनाओं से पूरे इलाके में युद्ध फैलने का खतरा बढ़ गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन पर कैस्पियन सागर में एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर हमला करने का आरोप लगाया। मंत्रालय के मुताबिक इस हमले में हुए विस्फोट से एक नाविक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया।

ईरान ने तेहरान में यूक्रेन के राजनयिक को बुलाकर इसे दुश्मनी भरा और आपराधिक हमला बताया।

इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कैस्पियन सागर में लंबी दूरी के हमलों की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि रूस मध्य पूर्व में सैटेलाइट की जानकारी ईरान को दे रहा है।

सऊदी अरब पर हूथियों का हमला, यमन जंग फिर शुरू

इसी दिन ईरान समर्थित यमन के हूती गुट ने सऊदी अरब के दो तेल ठिकानों पर हमला किया। हूती प्रवक्ता ने कहा कि जिजान और यानबू में अरामको की रिफाइनरी और भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया गया। वीडियो में जिजान रिफाइनरी से धुएं का गुबार उठता दिखा।

ग्रीक सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यानबू में दागी गई 2 बैलिस्टिक मिसाइलों को अमेरिका की पैट्रियट मिसाइल से मार गिराया गया। यानबू सऊदी का सबसे अहम लाल सागर तेल बंदरगाह है और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद यह तेल भेजने का मुख्य रास्ता बन गया है।

जिजान रिफाइनरी में रोज 4 लाख बैरल तेल बनता है। जवाब में सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के मारिब, अल-जौफ और होदेदाह में हूतियों के ठिकानों पर बमबारी की। यमन के अधिकारियों ने कहा कि दोनों पक्ष अब फिर से मोर्चे पर सेना जुटा रहे हैं।

2022 से रुका हुआ यमन का गृह युद्ध इस महीने फिर शुरू हो गया है। हूतियों ने पिछले हफ्ते सऊदी की नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की थी और गुरुवार को लाल सागर में दो सऊदी टैंकरों पर भी हमला किया था।

अमेरिका भी सक्रिय

अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में एक जहाज को रोका, जिसने नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद लाल सागर का रास्ता भी बाधित हुआ तो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।