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मिडिल-ईस्ट में नई हलचल की आहट, क्या कुर्द बलों को हथियार देगी CIA? ईरान पर दबाव बनाने का बड़ा प्लान

Published: Wed, 04 Mar 2026 02:20 PM (IST)

मिडिल-ईस्ट में तनाव के बीच, अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ईरान के भीतर अस्थिरता बढ़ाने के लिए कुर्द बलों को हथियार ...और पढ़ें

कुर्द बलों को ईरान में हथियार देने पर विचार कर रहा है अमेरिका। (AI Generated Image)

कुर्द बलों को ईरान में हथियार देने पर विचार कर रहा है अमेरिका। (AI Generated Image)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक नई रणनीतिक हलचल सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ईरान के भीतर अस्थिरता बढ़ाने के उद्देश्य से कुर्द बलों को हथियार उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।

इस योजना को लेकर ट्रंप प्रशासन ने इराक के कुर्द नेताओं और ईरानी विपक्षी समूहों से सक्रिय बातचीत की है।

हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह कदम ईरान के पश्चिमी इलाकों में दबाव बढ़ाने और तेहरान की सैन्य ताकत को कई मोर्चों पर उलझाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

ईरान के पश्चिमी मोर्चे पर बढ़ सकता है दबाव

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित योजना के तहत कुर्द सशस्त्र समूह ईरानी सुरक्षा बलों को सीमावर्ती क्षेत्रों में उलझाए रख सकते हैं। इससे बड़े शहरों से सुरक्षा बलों की तैनाती कम हो सकती है और नागरिक विरोध प्रदर्शनों को गति मिलने की संभावना बन सकती है।

एक वरिष्ठ ईरानी कुर्द अधिकारी ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में पश्चिमी ईरान में जमीनी स्तर पर कार्रवाई देखने को मिल सकती है। उनका दावा है कि उन्हें अमेरिका और इजरायल से समर्थन मिलने की उम्मीद है।

दूसरी ओर, ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हाल ही में कुर्द ठिकानों पर दर्जनों ड्रोन से हमले करने का दावा किया है। इससे साफ है कि तेहरान इस संभावित मोर्चे को लेकर सतर्क है।

इराकी कुर्दिस्तान की भूमिका अहम

यदि अमेरिकी योजना आगे बढ़ती है तो इसके लिए इराक के कुर्द प्रशासन की सहमति जरूरी होगी। हथियारों की आपूर्ति और अभियानों के लिए इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र को आधार बनाने पर विचार किया जा रहा है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक प्रस्ताव यह भी है कि कुर्द समूह उत्तरी ईरान में किसी सीमित इलाके पर कब्जा कर ‘बफर जोन’ बना सकते हैं। हालांकि यह विकल्प बेहद संवेदनशील माना जा रहा है और इससे क्षेत्रीय समीकरण और जटिल हो सकते हैं।

कुर्द राजनीति की अंदरूनी चुनौतियां

कुर्द समुदाय दुनिया के सबसे बड़े जातीय समूहों में से एक है, जिनका अपना स्वतंत्र राष्ट्र नहीं है। लगभग 2.5 से 3 करोड़ कुर्द तुर्किये, इराक, ईरान, सीरिया और आर्मेनिया के हिस्सों में फैले हुए हैं।

हालांकि ईरानी कुर्द सशस्त्र गुटों के पास हजारों लड़ाके मौजूद बताए जाते हैं, लेकिन उनके बीच वैचारिक मतभेद और आपसी प्रतिस्पर्धा भी कम नहीं है। यही कारण है कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी कुछ अधिकारी इस संभावित सहयोग को लेकर सतर्क हैं।

क्या बदलेगा क्षेत्रीय समीकरण?

अगर यह योजना अमल में आती है तो ईरान के लिए यह एक अतिरिक्त सैन्य और राजनीतिक चुनौती बन सकती है। इससे पहले भी क्षेत्रीय शक्तियों के बीच प्रॉक्सी रणनीतियों ने हालात को और जटिल बनाया है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी प्रशासन इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देगा या नहीं। लेकिन इतना तय है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में नई भू-राजनीतिक हलचल को जन्म दे सकता है।

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