चीनी कंपनियों का बड़ा खेल, AI और ओपन डेटा के जरिए अमेरिकी सैन्य ठिकानों की जासूसी का दावा
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कंपनियां AI और ओपन-सोर्स डेटा का उपयोग कर अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की निगरानी कर रही हैं, जिससे नए जोखिम पैदा हो रहे हैं।
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चीनी कंपनियां AI से कर रही हैं अमेरिकी सैन्य ठिकानों की जासूसी (यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच हैरान करने वाली खबर सामने आई है। द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ओपन-सोर्स डेटा का इस्तेमाल कर रही हैं। जिससे अमेरिका में युद्ध के मैदान में निगरानी से जुड़े उभरते जोखिमों को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
चीन की ज्यादा से ज्यादा निजी कंपनियां ऐसे इंटेलिजेंस टूल बाजार में ला रही हैं, जो अमेरिकी सेना की गतिविधियों को बेनकाब करने का दावा करते हैं।
AI के जरिए पता कर रही सैन्य ठिकानों की जानकारी
दरअसल, एक ओर जहां चीनी निजी कंपनियां सैटेलाइट तस्वीरों, फ्लाइट ट्रैकर्स और शिपिंग डेटा को AI के जरिए प्रोसेस करके अमेरिकी विमान वाहक पोतों और सैन्य ठिकानों की सटीक स्थिति बेनकाब करने का दावा कर रही हैं। वहीं, दूसरी ओर चीन सार्वजनिक रूप से इसको खुद से अलग रखने का दावा कर रहा है।
ऑनलाइन पोस्ट में अमेरिकी विमान वाहक पोतों की गतिविधियों, विमानों की स्थिति और सैन्य ठिकानों पर होने वाली हलचल की बारीक जानकारियां सामने आई हैं। इसमें शामिल कुछ कंपनियों के चीन के सैन्य तंत्र से संबंध बताए जा रहे हैं।
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ये कंपनियां बीजिंग के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं, जिसके तहत निजी क्षेत्र के नवाचारों को रक्षा क्षमताओं में एकीकृत किया जा रहा है और जिसे नागरिक-सैन्य एकीकरण रणनीति के तहत महत्वपूर्ण सरकारी निवेश का समर्थन प्राप्त है।
अमेरिकी अधिकारियों में मतभेद
अमेरिकी अधिकारी और विश्लेषक इस खतरे की गंभीरता को लेकर बंटे हुए हैं। कुछ अधिकारी सवाल उठा रहे हैं कि क्या इन उपकरणों का सक्रिय रूप से दुश्मनों द्वारा उपयोग किया जा रहा है। वहीं, कुछ चेतावनी दगे रहे हैं कि इनकी बढ़ती परिष्कृतता भविष्य के संघर्षों में अमेरिका के लिए सैन्य गतिविधियों को छिपाना मुश्किल बना सकती है।
चीन ने प्रत्यक्ष रूप से ईरान युद्ध में हस्तक्षेप से परहेज करते हुए युद्धविराम और शांति वार्ता की अपील की है। भले ही उसका निजी क्षेत्र युद्ध का लाभ उठा रहा हो। विश्लेषकों का कहना है कि यह दोहरी रणनीति चीन को औपचारिक रूप से संघर्ष में प्रवेश किए बिना रणनीतिक रूप से लाभ उठाने की अनुमति देती है।
