यूनाइटेड नेशंस, एएफपी। मौजूदा समय में पूरी दुनिया के लिए आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा और आतंकवादी सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। हालांकि इससे निपटने के लिए भारत, अमेरिका समेत कई वैश्विक देश प्रतिबद्ध हैं, मगर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध की राह में कई रोड़े हैं और अलकायदा भी इसमें शामिल है जिसके बारे में समझा जा रहा था कि इसका अस्तित्‍व संकट में है। जबकि हकीकत ये है कि यह आतंकी संगठन और तेजी से मजबूत होता जा रहा है।

संयुक्‍त राष्‍ट्र की एक ताजा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। यूएन सेंक्‍शंस मॉनिटर्स ने अपनी इस रिपोर्ट में कहा है कि कुछ क्षेत्रों में अलकायदा का वैश्विक नेटवर्क इस्‍लामिक स्‍टेट (आइएस) ग्रुप से कहीं ज्‍यादा खतरा बना हुआ है। सिक्‍युरिटी काउंसिल को भेजे इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अरब प्रायद्वीप में अलकायदा का गुट पूरे संगठन के लिए एक कम्‍यूनिकेशंस हब के तौर पर सेवाएं दे रहा है।

अलकायदा के सहयोगी आतंकी संगठन भी कुछ क्षेत्रों में प्रमुख रूप से खतरा बने हुए हैं। जैसे कि सोमालिया और यमन, जहां लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं। वहीं पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण एशिया में भी अलकायदा से जुड़े संगठन बड़ा खतरा बने हुए हैं, क्‍योंकि आइएस के सहयोगी संगठन मौजूदा समय में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की कोशिश में ही जुटे हुए हैं।

हालांकि संयुक्‍त राष्‍ट्र के सदस्‍य अलकायदा और आइएस के संगठनों के बीच संबंध की संभावनाओं को भी देख रहे हैं। इसके साथ ही उन्‍होंने चेताया है कि कुछ क्षेत्रों में यह नया खतरा पैदा हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आइएस ने पिछले साल सीरिया और इराक में अपने प्रभुत्‍व को खो दिया था, मगर अलकायदा अब भी अस्तित्‍व में है।

सीरिया में अल-नुसरा फ्रंट अब भी सबसे मजबूत और अलकायदा का वैश्विक रूप से सबसे बड़ा सहयोगी संगठन बना हुआ है। इसके लड़ाके छोटे हथियारबंद संगठनों को खत्‍म करने के लिए हिंसा समेत तमात हथकंडे अपना रहे हैं। अल-नुसरा में 7000 से लेकर 11000 लड़ाके हैं, जिनमें हजारों की संख्‍या में विदेशी शामिल हैं और इनका मुख्‍य ताकत सीरिया के इदलिब प्रांत में है।

Posted By: Pratibha Kumari

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