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होर्मुज में 7 तेल टैंकर क्षतिग्रस्त, ईरान ने अमेरिका को दी ठिकानों पर हमले की चेतावनी

Published: Fri, 23 Oct 2026 12:34 AM (GMT+05:30)

ईरानी आईआरजीसी नौसेना के बयान का हवाला देते हुए बताया कि चार टैंकरों में तेल ले जाते समय निशाना बनाने ...और पढ़ें

आईआरजीसी ने दावा किया है कि होर्मुज में रात भर में सात तेल टैंकर क्षतिग्रस्त हो गए

आईआरजीसी ने दावा किया है कि होर्मुज में रात भर में सात तेल टैंकर क्षतिग्रस्त हो गए

HighLights

  1. यह होर्मुज में एक दिन में सबसे ज्यादा जहाजों के क्षतिग्रस्त होने का मामला होगा

  2. युद्ध के दौरान आईआरजीसी ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर नियमित रूप से हमले किए हैं

डिजिटल डेस्क, तेहरान। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि होर्मुज में रात भर में सात तेल टैंकर क्षतिग्रस्त हो गए।

ईरानी राज्य टेलीविजन ने आईआरजीसी नौसेना के बयान का हवाला देते हुए बताया कि चार टैंकरों में तेल ले जाते समय निशाना बनाने के बाद आग लग गई, जबकि तीन अन्य नौसैनिक बारूदी सुरंगों (माइन्स) से टकराकर क्षतिग्रस्त और अचल हो गए।

रिपोर्ट में हताहतों या जहाजों के झंडे की कोई जानकारी नहीं दी गई। यदि यह पुष्टि होती है तो 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में एक दिन में सबसे ज्यादा जहाजों के क्षतिग्रस्त होने का मामला होगा।

अमेरिकी ठिकानों पर हमले की चेतावनी

आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जलडमरूमध्य के अन्य हिस्सों से तेल टैंकरों की आवाजाही की सुविधा मुहैया कराता है तो वह क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है। युद्ध के दौरान आईआरजीसी ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर नियमित रूप से हमले किए हैं।

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मेजर जनरल मोहसेन रजाई ने कहा कि ईरान के तेल सुविधाओं, बंदरगाहों और शिपिंग को वैध लक्ष्य मानना और दूसरी तरफ युद्ध का समर्थन करने वाले देशों के आर्थिक बुनियादी ढांचे को हमेशा सुरक्षित समझना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि तेहरान अब सिर्फ राजनीतिक सद्भावना पर आधारित समझौतों में दिलचस्पी नहीं रखता।

रजाई ने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की शर्त अमेरिका को बताई गई शर्तों के लागू होने पर निर्भर है। उन्होंने क्षेत्रीय देशों के साथ एक बेहतर सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा का जिक्र किया, जिसमें ऊर्जा सुविधाओं, शिपिंग लेन और नागरिक बुनियादी ढांचे को हमलों से आपसी रूप से बाहर रखा जाए।

यह घटना पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आई है, जहां अमेरिका और इजरायल नए हमलों की तैयारी कर रहे हैं और ईरान जवाबी कार्रवाई की धमकियां दे रहा है।