जकार्ता, पीटीआइ। इंडोनेशिया के मालुकु द्वीप में बीते गुरुवार को आए तेज भूकंप में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। यही नहीं करीब 25,000 लोगों को अपने घर-बार छोड़ने पड़े हैं। बताया जाता है कि भूकंप से इमारतें धराशाही हो गईं और घबराए लोग सड़कों पर उतर आए थे। यही नहीं भूस्खलन की घटनाओं में भी कुछ लोगों के मारे जाने की सूचना है। एम्बोन शहर के क्षेत्रीय गवर्नर ने नौ अक्टूबर तक आपात स्थिति की घोषणा की है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक, भूकंप के कारण हुए हादसों में 156 लोग घायल भी हो गए हैं। यही नहीं भूकंप के कारण सैकड़ों घर, कार्यालय, स्कूल और जन सुविधा स्थल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। अधिकारियों ने कई जिलों में आपात शिविर तथा सामुदायिक रसोईयों की व्यवस्था की है। अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने बताया था कि भूकंप का केंद्र मालुकु प्रांत के एम्बोन से 37 किलोमीटर पूर्वोत्तर में 29 किलोमीटर की गहराई में था।

बता दें कि पिछले साल सुलावेसी के पालू में 7.5 तीव्रता का तगड़ा भूकंप आया था जिसके बाद उठी सुनामी से 4,300 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। रेडक्रॉस के अनुसार, यह आपदा इतनी भीषण थी कि 60,000 लोग अब तक अस्थायी आवासों में रह रहे हैं। यही नहीं सुमात्रा के तटीय हिस्से में 2004 में आए 9.1 तीव्रता के भूकंप और सुनामी से इस क्षेत्र में और आसपास करीब 2,20,000 लोग मारे गए थे। इनमें से 1,70,000 लोग इंडोनेशिया में मारे गए थे।

रविवार को फिलीपींस के मिंडानाओ द्वीप में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.4 मापी गई। बीते मंगलवार को गुलाम कश्मीर (POK) में विनाशकारी भूकंप आया था जिसमें 38 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 452 लोग जख्‍मी हो गए थे। यह भूकंप 5.8 तीव्रता का था। इसका केंद्र मीरपुर शहर के समीप सतह से मात्र 10 किलोमीटर नीचे था। इसके झटके 8-10 सेकंड तक इस्लामाबाद, पेशावर, रावलपिंडी और लाहौर के प्रमुख शहरों सहित पूरे पाकिस्तान में महसूस किए गए थे। यही नहीं इन्‍हें नई दिल्ली समेत भारत के उत्तरी हिस्सों में भी महसूस किया गया था।

Edited By: Krishna Bihari Singh