ताइपे, रायटर। अमेरिकी सरकार ने कांग्रेस (संसद) को सूचित किया है कि वह ताइवान को 18 करोड़ डालर के उन्नत किस्म के टॉरपीडो की संभावित बिक्री कर सकती है। इससे अमेरिका और चीन के बीच तनावपूर्ण संबंधों में और खटास आ गई है। ज्यादातर देशों की तरह अमेरिका के ताइवान के साथ अधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं लेकिन वह कानूनी रूप से इसे देश की रक्षा के लिए मदद करने को बाध्य है। हालांकि चीन हमेशा ही ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का विरोध करता रहा है।

अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने बुधवार को एक बयान में बताया कि अमेरिकी विदेश विभाग ने ताइवान को 18 एमके-48 मॉड 6 टॉरपीडो और संबंधित उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दी है। इस सौदे की लागत करीब 18 करोड़ डालर होगी। अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने इस संभावित बिक्री के लिए जरूरी प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए कांग्रेस को यह जानकारी दी है।

एजेंसी के अनुसार, ताइवान को बल देने वाली इस प्रस्तावित बिक्री से अमेरिका के राष्ट्रीय, आर्थिक और सुरक्षा के हित सधेंगे। उधर बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा कि इस प्रस्तावित सौदे पर चीन ने वाशिंगटन के साथ गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। चीन ने चीन-अमेरिकी संबंधों को और अधिक क्षति पहुंचाने से रोकनेके लिए अमेरिका से ताइवान को हथियारों की बिक्री रोककर सैन्य संबंध तोड़ने को कहा है।

उल्‍लेखनीय है कि ताइवान के राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने कल यानी बुधवार को ही चीन की संप्रभुता के दावे पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि कहा कि वह चीन के 'वन कंट्री, दू सिस्‍टम' के स्‍वायत्‍तता के प्रस्‍ताव के तहत चीन का हिस्‍सा बनना स्‍वीकार नहीं करेगा। इस बयान से बौखलाए चीन ने कहा है कि ताइवान एक चीनी प्रांत है जिसके पास किसी राज्य से अलग होने का अधिकार नहीं है। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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