जेनेवा, प्रेट्र। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चीन में मानवाधिकारों के दमन पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि शिंजियांग के मुस्लिम बहुल इलाके में उइगर मुसलमानों के साथ बेहद बर्बर व्यवहार हो रहा है । चीन ने तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र की आजादी भी छीन ली है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायोग कार्यालय ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा कि चीन की सरकार से नागरिकों की मौलिक आजादी का दमन रोकने के लिए कई बार बात की जा चुकी है । संयुक्त राष्ट्र ने शिंजियांग प्रांत और तिब्बत के लोगों के दमन को लेकर एतराज जताया था। वहां वकीलों को बंदी बनाए जाने और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के गायब होने पर भी सवाल उठाए थे। संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने कोविड-19 पर जानकारी दे रहे पत्रकारों, स्वास्थ्य कर्मियों के भी दमन की बात भी कही है। 

हांगकांग में चीन के अत्याचार को लेकर चिंता

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने हांग कांग में चीन के अत्याचार को लेकर चिंता व्यक्त की है। आयोग ने वहां हो रहे प्रदर्शनों को दबाने और उत्पीड़न के आरोपों पर चीन से सवाल किया है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अमेरिका, ब्रिटेन की अपील पर इस मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा की गई थी। 

'आजादी दबाए जाने को लेकर चिंता' 

UNHRC उच्चायुक्त के ऑफिस ने बयान जारी कर कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र विशेषज्ञ ने चीन से लगातार संपर्क किया है और चीन में मूलभूत आजादी को दबाए जाने को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि हांग कांग विशेष प्रशासन में विरोध प्रदर्शनों और लोकतंत्र की वकालत को दबाया जाता है। 

'हांग कांग मेें बलप्रयोग और महिलाओं का शोषण-उत्पीड़न' 

UNHRC ने यह भी आरोप लगाया है कि वहां पुलिस को अत्याधिक बलप्रयोग की भी इजाजत है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केमिकल एजेंट्स तक इस्तेमाल किए जाते हैं। यही नहीं, महिला प्रदर्शनकारियों के पुलिस स्टेशनों में यौन शोषण और प्रताड़ना और हेल्थ केयर वर्कर्स की प्रताड़ना के आरोप भी लगे हैं। चीन हॉन्ग-कॉन्ग पर पकड़ मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लाया है। इस पर काम करने के लिए उसने एक ब्यूरो भी खोलने का फैसला किया है। चीन ने इसे आंतरिक मुद्दा बताया है। इस कानून के लागू होने के बाद हांग कांग में विरोध प्रदर्शन करना आसान नहीं होगा। 

Posted By: Arun Kumar Singh

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