हांगकांग, रायटर। हांगकांग में प्रस्तावित प्रत्यर्पण कानून के खिलाफ प्रदर्शनकारियों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। उनका यह गुस्सा चीन को हांगकांग सौंपने की 22वीं वर्षगांठ के मौके पर सोमवार को भी देखने को मिला। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने लोहे की ट्रॉली से खिड़की तोड़कर विधायी परिषद में घुसने की कोशिश की। स्वायत्तशासी हांगकांग में आरोपितों को चीन प्रत्यर्पित करने वाले प्रस्तावित कानून के खिलाफ पिछले तीन हफ्ते से विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है।

हांगकांग की विधायी परिषद में घुसने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए दंगारोधी पुलिस ने मिर्च पाउडर का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद ज्यादातर प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे। उन्होंने इससे बचने की तैयारी कर रखी थी। सख्त टोपी पहनने के साथ ही उन्होंने अपने चेहरे ढक रखे थे। चेन नाम के 24 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'पिछले कुछ वर्षो से लोग ज्यादा सक्रिय हुए हैं क्योंकि उन्होंने यह पाया कि शांतिपूर्ण तरीकों का कोई असर नहीं हो रहा है।'

विवादास्पद प्रत्यर्पण कानून के चलते बड़ी चुनौती का सामना कर रहीं चीन समर्थित हांगकांग की नेता कैरी लैम ने कहा, 'सरकार को शासन की शैली बदलने की जरूरत है। मेरी सरकार की मंशा अच्छी है। मैं लोगों की इच्छाओं, भावनाओं और राय के साथ निकटता से काम करूंगी।'

1997 से चीन के नियंत्रण में है हांगकांग
ब्रिटेन ने एक जुलाई, 1997 को हांगकांग चीन को सौंपा था। तब यह शर्त रखी गई थी कि चीन इसकी स्वायत्तता बरकरार रखेगा।

ब्रिटेन की कोई जिम्मेदारी नहीं: चीन
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने सोमवार को बीजिंग में कहा कि हांगकांग को लेकर ब्रिटेन की कोई जिम्मेदारी नहीं है। उनका यह बयान ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेरमी हंट की उस टिप्पणी के जवाब में आया है जिसमें हंट ने कहा था कि उनका देश हांगकांग को सौंपे जाने की शर्तो को लेकर चीन पर दबाव बनाना जारी रखेगा।

Posted By: Dhyanendra Singh

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