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चीन के कर्ज जाल में फंसा मालदीव, भारत के लिए हो सकता है बड़ा खतरा

मुख्य विपक्षी पार्टी के अनुसार, मालदीव पहले से ही चीन के साथ कर्ज के जाल में फंसा है, मालदीव चीन को 70 प्रतिशत कर्ज का भुगतान कर रहा है।

By Srishti VermaEdited By: Published: Fri, 01 Dec 2017 12:32 PM (IST)Updated: Fri, 01 Dec 2017 04:32 PM (IST)
चीन के कर्ज जाल में फंसा मालदीव, भारत के लिए हो सकता है बड़ा खतरा

बीजिंग (एजेंसी)। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी और भारत के सुरक्षा हालात पर हाल ही में मालदीव ने चिंता जताई थी। अब खबर है कि मालदीव की अब्दुल यामीन सरकार ने चीन की राजधानी बीजिंग के साथ 'स्वतंत्र व्यापार समझौता' (FTA) किया है। जानकारी के मुताबिक मालदीव ने अपने विपक्ष और अपने नागरिकों को विश्वास में लिए बिना ही ये प्रक्रिया पूरी कर ली है। जिसके बाद विपक्ष ने सरकार को निशाने पर ले लिया है। 

मुख्य विपक्षी पार्टी के अनुसार, मालदीव पहले से ही चीन के साथ कर्ज के जाल में फंसा है, मालदीव चीन को 70 प्रतिशत कर्ज का भुगतान कर रहा है। विपक्षी पार्टी का कहना है, "हम इस बात पर चिंतित हैं कि देश चीन के साथ कर्ज में डूबा है। अब इस समझौते का परिणाम यह होगा कि रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति पर अतिरिक्त तनाव का बोझ और हिंद महासागर क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ जाएगी।"

विपक्ष के मुताबिक, संसद के अध्यक्ष ने 29 नवंबर को निशुल्क व्यापार समझौते को पारित करने के लिए आपातकालीन बैठक बुलाई। हालांकि इस मुद्दे पर सितंबर में बातचीत पूरी हो चुकी थी और यमीन ने बुधवार को दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कर दिए थे।

विपक्ष के बयान में यह भी कहा गया है कि "समझौते की प्रक्रिया संसदीय प्रक्रियाओं के खिलाफ की गई। आम नागरिक और मीडिया के लिए विचार-विमर्श करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। दस्तावेजों को सांसदों तक भी नहीं पहुंचने दिया गया। इसके अलावा सरकार ने समझौते के 1000 पन्नों की स्वीकृति के लिए 1 घंटे से भी कम समय लिया।" आपको बता दें कि मालदीव एकमात्र ऐसा देश है जहां पीएम नरेंद्र मोदी ने अब तक दौरा नहीं किया है।

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