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नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। धरती के तमाम कोनों पर सदियों पहले डायनोसॉर का राज था, ये बातें कई बार सामने आ चुकी हैं। लंबे चौड़े डायनोसॉर के कंकालों ने इस बात को सिद्ध भी किया है। इनमें कई मांसाहारी और कई शाकाहारी भी बताए गए, ये सब वैज्ञानिकों की रिसर्च में सामने आ चुका है। अब जापान के वैज्ञानिकों को डायनोसॉर की नई प्रजाति का कंकाल मिला है। उन्होंने इसकी पहचान की है। वैज्ञानिकों को इस प्रजाति के डायनोसॉर का जापान में सबसे बड़ा कंकाल भी मिला है। डायनोसॉर का यह करीब 26 फीट लंबा है।

7.2 करोड़ साल पुरानी अस्थियों का किया विश्लेषण
जापान के होक्काइदो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक टीम करीब 7.2 करोड़ साल पुरानी अस्थियों का विश्लेषण किया, इनका विश्लेषण करने के बाद ही वो इस नतीजे पर पहुंची है कि यह कंकाल एक नई प्रजाति के डायनोसॉर का हैं। इस प्रजाति को हाड्रोसुआरिड डायनोसॉर नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह डायनोसॉर शाकाहारी प्रवृत्ति का था। ये डायनोसॉर पृथ्वी पर क्रिटेशस दौर के आखिरी सालों में घूमा करता था।

जापानी ड्रैगन गॉड
जापान में वैज्ञानिकों को सबसे पहले इस जीव की पूंछ का एक छोटा सा हिस्सा मिला था, ये हिस्सा उत्तरी जापान में साल 2013 में पाया गया था, बाद में खुदाई के दौरान इसका पूरा कंकाल निकल कर बाहर आया। यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर बताया है कि वैज्ञानिकों ने इसे "कामुयसौरस जापोनिकस" नाम दिया है। इसका मतलब है "जापानी ड्रैगन गॉड."।

4 टन वजनी था डायनोसॉर
वैज्ञानिक मान रहे हैं कि यह डायनोसॉर 9 साल की उम्र का एक वयस्क था, उस समय उसका वजन 4 टन से लेकर 5.3 टन तक रहा होगा। डायनोसॉर का वजन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह दो पैरों से चलता था या फिर चार पैरों पर। यदि वजन अधिक हो जाता है तो वो चार पैरों पर चलते हैं यदि कम रहता है तो वो चलने के लिए दो पैर का इस्तेमाल करते हैं।

डायनोसॉर की एक अलग दुनिया जापान और ईस्ट एशिया में थी
डायनोसॉर की इस नई प्रजाति की खोज की विस्तृत रिपोर्ट "साइंटिफिक रिपोर्ट्स" जर्नल में छपी है। वैज्ञानिकों की इस टीम के प्रमुख योसित्सुगु कोबायाशी का कहना है कि जापान में एक नए डायनोसॉर की खोज के सच होने का मतल है कि कभी डायनोसॉर की एक अलग दुनिया जापान और ईस्ट एशिया में मौजूद थी। कामुयसॉरस जापोनिकस संभवत: तटवर्ती इलाकों में रहता था जो डायनोसॉर के लिए उस वक्त एक दुर्लभ आवास था। अब वैज्ञानिक इसके जीवाश्म पर रिसर्च कर रहे हैं उनका मानना है कि उस वक्त के वातावरण के बारे में भी अच्छी जानकारी मिल सकती है। 

Posted By: Vinay Tiwari

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