नया निजाम, नई बंदिशें, ऐलान नया...

हम फ़कत लश्करे-शाही के ही माफिक सोचें

साहिबे वक्त ने ये हुक्म किया है जारी

अपनी नस्लों से कहो, मेरे मुताबिक सोचें...


नई दिल्ली [स्पेशल डेस्क]। कवि डॉ. कुमार विश्वास जब भी इन पंक्तियों को सुनाते हैं तो उनके चेहरे पर एक अलग ही तेज देखने को मिलता है। न जाने उन्होंने ये पंक्तियां किसके लिए लिखी थीं, लेकिन आज यह एक शख्स पर बिल्कुल सटीक बैठ रही हैं। एक आदेश हुआ है कि घर में अपने अराध्य की तस्वीर की बजाय इस शख्स की तस्वीर लगाई जाए...

 

क्या हुआ है आदेश और कौन है वह शख्स

पड़ोसी देश चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने एक मुहिम चलाई है। इसके तहत चीन में ईसाई समुदाय के लोगों को अपने घरों में यीशु की तस्वीर की जगह राष्ट्रपति शी चिनफिंग की तस्वीर लगाने को कहा जा रहा है। दरअसल चीन में ताजे पानी की सबसे बड़ी झील पोयांग के पास युगान में हजारों की संख्या में ईसाई निवास करते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है।


ईसा मसीह नहीं कम्युनिस्ट पार्टी दिलाएगी गरीबी से मुक्ति

ईसाई परिवारों पर घरों से यीशू की तस्वीर हटाकर चिनफिंग की तस्वीर लगाने का दबाव है। प्रशासनिक अधिकारी ईसाई समाज के लोगों से कह रहे हैं कि गरीबी व बीमारी से मुक्ति कम्युनिस्ट पार्टी ही दिला सकती है। इसलिए ईसा मसीह की जगह पार्टी के सर्वोच्च नेता चिनफिंग की तस्वीर लगाओ। चीनी राष्ट्रपति ही सारी समस्याओं का हल निकाल सकते हैं।

 

चीन की 11 फीसद आबादी गरीब

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार चीन की 11 फीसद आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर है। हालांकि चीन में मीडिया पर जिस तरह के प्रतिबंध हैं, उन्हें देखते हुए लगता है कि यह आंकड़ा भी काफी कम करके बताया गया है। इसके बावजूद इस गरीब जनसंख्या में से भी 10 फीसद आबादी ईसाईयों की है।

 

हटाए गए यीशू के पोस्टर

 

अमेरिका के प्रमुख अखबार वॉशिंगटन पोस्ट की मानें तो युगान में यीशु के संदेशों वाले 624 पोस्टरों को हटाया भी जा चुका है। अब इनकी जगह चिनफिंग के 453 पोस्टर लगाए गए हैं। यानि स्पष्ट है कि चीन में अब राष्ट्रपति चिनफिंग को ईसा मसीह से भी ऊपर का दर्जा दिया जा रहा है।

 

पहली बार नहीं हुआ चीन में ऐसा

राष्ट्रपति चिनफिंग लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति चुने गए हैं और पार्टी पर भी उनकी पकड़ मजबूत है। अब उनका कद भी माओ के बराबर हो गया है। शायद यही कारण है कि चिनफिंग को लेकर देश में ऐसा माहौल देखने को मिल रहा है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि चीन में ऐसा पहली बार हो रहा है। इससे पहले माओ के कार्यकाल में भी ऐसा ही हो चुका है।

 

घर-घर लगी थी माओ की तस्वीर

माओत्से तुंग जब अपने सत्ता के शिखर पर था तो उस समय भी ऐसा ही हुआ था। उस समय कम्युनिस्ट पार्टी के पहले नेता माओ की तस्वीर भी घर-घर लगाई गई थी।

 

रमजान पर भी लगा प्रतिबंध

यही नहीं चीन इससे पहले मुस्लिमों के पवित्र रमजान महीने पर भी प्रतिबंध लगा चुका है। चीन  रमजान में फास्टिंग पर रोक चुका है। इसके अलावा वह तिब्बत्तियों के धर्मगुरु दलाई लामा को लेकर भी जब-तब बयानबाजी करता रहता है और उन्हें धार्मिक गुरु मानने से इनकार करता रहता है।

Posted By: Digpal Singh

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