नई दिल्ली, रॉयटर्स। चीन के साथ तनाव के बीच भारतीय सेना लद्दाख में किसी भी तरह की ढील नहीं देना चाह रही है। इस वजह से इस बार सर्दियों के मौसम में भी लद्दाख में अपनी तैनाती बरकरार रखेगी। भारतीय सेना वहां की दुर्गम परिस्थितियों में सर्दियां बिताने की पूरी तैयारी कर रही है। इसके लिए खच्चरों से ले कर बड़े विमानों तक, सेना ने वहां मौजूद हजारों सैनिकों तक रसद पहुंचाने के लिए अपने पूरे लॉजिस्टिक्स तंत्र को सक्रिय कर दिया है।

देश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा अभियान 

सेना के अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह की तैयारियां की जा रही हैं वो देश के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी तैयारी है। बीते कुछ महीनों में जो सैन्य लॉजिस्टिक्स अभियान चला है वो देश के इतिहास में इस तरह के सबसे बड़े अभियानों में से एक है और इसके जरिए भारी मात्रा में गोला बारूद, उपकरण, ईंधन, सर्दियों के लिए रसद और खाने पीने का सामान लद्दाख तक पहुंचा दिया गया है। सामान पहुंचाने के लिए रणनीति के तहत काम किया जा रहा है। 

4 माह पहले ही शुरू कर दी गई थी तैयारी 

सेना की ओर से लद्दाख इलाके में इस अभियान की शुरुआत बीते मई माह में ही कर दी गई थी, उस समय चीन की सेना के साथ सीमा पर विवाद गहराने लगा था। वैसे अभी भी दोनों देश सीमा विवाद का समाधान निकालने के लिए आपस में बातचीत कर रहे हैं लेकिन अभी तक कोई नतीजा निकला नहीं है। चीनी सेना पहले भारत की बात मानती है फिर वायदा खिलाफी कर देती है।

पहले दोनों देशों के बीच सीमा से हटने पर सहमति बनी थी, जब भारतीय सैनिक वहां से हट गए तो चीनी सेना इलाके में और आगे तक आ पहुंची। इसके बाद भारतीय सेना ने भी पीछे हटने से मना कर दिया। चीनी सेना की चालबाजियों को देखते हुए अब भारतीय सेना ने इस जोखिम भरी, ऊंचाई पर स्थित सीमा पर सर्दियों में भी तैनाती बनाए रखने की तैयारी कर ली है। 

दोगुनी कर दी गई सैनिकों की संख्या 

मालूम हो कि पूर्वी लद्दाख के इलाके में चीनी सेना के साथ भारतीय सैनिकों की झड़प हुई थी। बताया जाता है कि इस इलाके में औसतन 20,000 से 30,000 सैनिक तैनात रहते हैं। लेकिन मौजूदा तनाव की वजह से इस इलाके में सैनिकों की संख्या दोगुनी कर दी गई है। भारतीय सेना के अधिकारियों का कहना है कि भारत की ओर से यहां पर पहले इतने सैनिकों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, जब चीन ने अपने सैनिकों की संख्या को बढ़ाना शुरू किया उसके बाद हमारी तरफ से भी तैनाती बढ़ाई गई। आज के समय में भारतीय सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अच्छे से तैयार है लेकिन ना वो तनाव को और बढ़ाना चाहती है और ना एक लंबा झगड़ा चाहती है।

4 माह तक बर्फ से ढक जाते हैं दर्रे 

अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख में तापमान माइनस पचास डिग्री से भी नीचे चला जाता है। ये जमाने वाली ठंड से भी काफी नीचे होता है। यहां सैनिकों की तैनाती अक्सर 15,000 फीट से भी ऊपर स्थित स्थानों पर होती है जहां ऑक्सीजन की कमी होती है।

लद्दाख के पहाड़ों के बीच के दर्रे हर साल करीब 4 महीनों तक बर्फ से ढंक जाते हैं, भारतीय सेना के योजनाकारों ने अभी से इलाके में 1,50,000 टन से भी ज्यादा सामान पहुंचा दिया है। सेना के 14 कोर के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अरविंद कपूर ने बताया हमें यहां पर जितनी भी रसद की जरूरत है उसे अभी से वहां पहुंचा दिया गया है। 

लेह के पास बनाया गया गोदाम 

लद्दाख के मुख्य शहर लेह के पास लॉजिस्टिक्स स्टोर बनाया गया है। यहां एक ईंधन, तेल और लुब्रीकेंट के डिपो में एक ढलान में हरे ड्रमों के ढेर रखे हुए हैं। पास ही में एक रसद डिपो में राशन के डब्बों और बोरों का ऊंचा ढेर लगा दिया गया है। लेह के पास एक और स्थान पर टेंट, हीटर, सर्दियों के कपड़े और ऊंचाई पर काम आने वाले उपकरण स्टोर करके रख दिए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इन सभी डिपो से सामान ट्रकों, हेलीकॉप्टरों और कुछ दुर्गम इलाकों में खच्चरों के जरिए लॉजिस्टिक्स बिंदुओं तक पहुंचाया जाता है। उन्होंने बताया कि लद्दाख जैसी जगह में ऑपरेशन्स लॉजिस्टिक्स की बहुत अहमियत है, पिछले 20 सालों में हमने इसमें महारत हासिल कर ली है। अब हम इन सब चीजों की बदौलत बहुत बेहतर स्थिति में युद्ध कर सकते हैं। सैनिकों को ऐसी ऊंची पहाड़ियों पर रूकने में भी कोई समस्या नहीं होगी। 

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस