रिसर्च और एनालिसिस पर जमकर पैसे बहा रहा चीन, एआई-चिप में दुनिया को दे रहा चुनौती
चीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी में तेजी से वैश्विक नेता बन गया है, 1978 से अब तक शोध पत्रों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

चीन का R&D खर्च अमेरिका से आगे निकला।
HighLights
चीन का R&D खर्च 2024 में अमेरिका से आगे निकला।
AI, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष में चीन की बड़ी प्रगति।
तकनीकी आत्मनिर्भरता हेतु शोध पर विशेष जोर।
डिजिटल डेस्क, बीजिंग। चीन ने करीब 50 साल में विज्ञान की दुनिया में अपनी स्थिति तेजी से बदली है। 1978 में अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में चीन के वैज्ञानिकों के 120 से भी कम शोध प्रकाशित हुए थे, जो दुनिया के कुल शोध का महज 0.02% थे।
वहीं आज चीन शोध और तकनीकी के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। एआई, सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में चीन की उपलब्धियां वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा की दिशा बदल रही हैं।
रिसर्च और शोध खर्च में अमेरिका से आगे निकला चीन
आर्थिक विकास के लिए विज्ञान और शिक्षा को प्राथमिकता देने की नीति के कारण चीन के शोध एवं विकास बजट में पिछले तीन दशकों में करीब 100 गुना की बढ़ोतरी हुई है।
साल 2024 में क्रय शक्ति की समानता के आधार पर चीन का रिसर्च और शोध खर्च 97.73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो अमेरिका के 95.83 लाख करोड़ रुपये के खर्च से अधिक था।
यदि बाजार विनिमय दर से तुलना की जाए, तो चीन का खर्च अमेरिका के कुल खर्च का लगभग आधा था। हालांकि, यह 2004 के स्तर की तुलना में अभूतपूर्व वृद्धि है।
पिछले दशक में रिसर्च और शोध खर्च से सालाना 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। चीन ने 2030 तक इस खर्च में हर साल कम से कम 7 प्रतिशत की वृद्धि जारी रखने का लक्ष्य रखा है।
विदेशी तकनीक पर निर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा
कोरोना महामारी और अमेरिकी पाबंदियों ने चीन को अपनी तकनीक विकसित करने की जरूरत का एहसास कराया। सूझोउ की शीआन जियाओतोंग-लिवरपूल यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री हाओ बिन के मुताबिक महामारी में विदेशी विशेषज्ञों के जाने और वैज्ञानिक उपकरणों की आपूर्ति रुकने से कई तकनीकों का इस्तेमाल प्रभावित हुआ। इसके बाद चीन ने ऐसी नई खोजों पर जोर बढ़ाया, जिनसे विदेशी तकनीक पर निर्भरता घट सके। उसका लक्ष्य 2035 तक नवाचार केंद्र बनना है।
बुनियादी विज्ञान पर कम खर्च और शोध में गड़बड़ियां
तेज प्रगति के बाद भी चीन के सामने कुछ गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। चीन का अधिकांश बजट व्यावहरिक अनुप्रयोगों पर खर्च होता है, जबकि बुनियादी विज्ञान पर खर्च का अनुपात अब भी विकसित देशों की तुलना में कम है। वैज्ञानिक प्रकाशनों की संख्या तेजी से बढ़ने के साथ ही शोध में फर्जीवाड़े, डेटा में हेरफेर और गुणवत्ता से जुड़ी चिंताएं भी सामने आई हैं।
