हांगकांग, एएनआइ। पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारत के साथ जारी तनाव और अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों वापसी के बीच चीन ने पीएलए के पश्चिमी थिएटर कमांड को तगड़ी मजबूती दी है। इसकी तस्‍दीक इसी बात से हो जाती है जब बीते छह सितंबर को चीनी राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग ने पांच वरिष्ठ अधिकारियों की पदोन्‍नति‍ के एक समारोह की अध्यक्षता की। पांच लेफ्टिनेंट जनरलों (जिनमें सेना के दो, नौसेना से एक और वायु सेना के दो) को पीएलए की सर्वोच्च रैंक जनरल के रूप में पदोन्नत किया गया। इन जनरलों और एडमिरल को पीएलए नेवी (प्लान), पीएलए एयर फोर्स (पीएलएएएफ), नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी और पांच में से दो थिएटर कमांड की कमान सौंपी गई।

दिलचस्प बात यह है कि बीते नौ महीने से भी कम समय में सैन्‍य अधिकारियों के पदोन्‍नति से जुड़ा यह तीसरा तीन सितारा समारोह (three-star ceremony) था। अमूमन ऐसे समारोह साल में एक बार जुलाई के महीने में ही होते थे। इन कवायदों से ऐसा लगता है कि पीएलए में दुनिया की सबसे बड़ी सेना होने की सोच हावी है। पदोन्‍नति पाए जनरलों में एक वांग हाइजियांग हैं जिन्‍हें पश्चिमी थिएटर कमांड (Western Theater Command) का कमांडर बनाया गया है। ऐसे में जब एलएसी पर भारत से तनाव बना हुआ है दो साल से भी कम समय में पश्चिमी थिएटर कमांड के लिए तीसरे नए कमांडर की नियुक्ति चौंकाती है। साथ ही यह चीन के खतरनाक मंसूबों की ओर भी इशारा करती है।  

जानकारों का कहना है कि वांग हाइजियांग को पश्चिमी थिएटर कमांड (Western Theater Command) की जिम्‍मेदारी ऐसे ही नहीं दी गई है। वांग हाइजियांग के पास झिंजियांग और तिब्बत में काम करने का लंबा अनुभव है। ऐसे में जाहिर है कि पश्चिमी थिएटर कमांड में परिचालन उन्‍हें सहूलियत होगी क्‍योंकि क्षेत्र की भौगोलिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों से परिचित हैं। जानकारों का मानना है कि वांग की इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए उन्हें भारत के साथ गतिरोध में भूमिका निभाने वाली इस खास थिएटर कमांड को संभालने की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है। बीते दो वर्षों में इस कमांड के क्रिया कलापों पर नजर डालें तो भी चीन की मंशा बिल्‍कुल साफ हो जाती है।

बीते दिनों आई समाचार एजेंसी एएनआइ की एक अन्‍य रिपोर्ट में एक भारतीय आधिकारी के हवाले से बताया गया है कि चीन अभी भी पूर्वी लद्दाख में एलएसी से लगे अपने क्षेत्र में तैयारियों को जारी रखे हुए है। चीन की मंशा एलएसी पर लंबे समय तक टिके रहकर गतिरोध को बनाए रखनी की है। यही नहीं चीन तिब्‍बत को लेकर भी एक खास एजेंडे पर काम कर रहा है। चीन अपनी सेना में भारत से लगे तिब्‍बती इलाकों के युवाओं को भर्ती करने पर काम कर रहा है। यही नहीं एलएसी पर अपने इलाके में वह कंक्रीट से बने स्‍थाई ठिकानों का निर्माण भी कर रहा है...