काठमांडू, एएनआइ। चीन मित्रता की आड़ में नेपाल की पीठ में छुरा घोंप रहा है। चीन ने नेपाल की सीमावर्ती जिले हुमला में घुसकर वहां काफी बड़े इलाके की बाड़बंदी और तारबंदी कर दी है। इस बात की पुष्टि नेपाल के गृह मंत्रालय द्वारा इस मसले पर गठित अध्ययन दल की रिपोर्ट से हुई है। इस अध्ययन दल ने मौके के दौरे में पाया कि चीन के सैनिकों ने नेपाल का काफी बड़ा इलाका घेर लिया है। यह रिपोर्ट मिलने के बाद नेपाल का विदेश मंत्रालय सक्रिय हो गया है और उसने काठमांडू स्थित चीन के दूतावास से वार्ता की है।

अध्ययन दल का नेतृत्व कर रहे गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव जय नारायण आचार्य ने गृह मंत्री बालकृष्ण खंड को रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें सीमा क्षेत्र की मुश्किलों का भी उल्लेख है। हुमला और कई अन्य सीमावर्ती जिलों में चीन के जमीन पर कब्जा करने का मामला कई वर्षो से चर्चा में है। विपक्ष में रहते हुए नेपाली कांग्रेस ने हुमला में चीनी सैनिकों द्वारा नेपाली जमीन पर कब्जा करने और सड़कें बना लेने का मुद्दा उठाया था लेकिन तत्कालीन केपी शर्मा ओली सरकार ने उस पर खास ध्यान नहीं दिया था। अब जबकि नेपाल में नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार है तब चीन की घुसपैठ की असलियत जानने के लिए उच्च स्तरीय अध्ययन दल गठित कर स्थिति पर रिपोर्ट मांगी गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हुमला जिले में जिस स्थान पर सीमा का उल्लंघन किया गया है, उसका निर्धारण दोनों देशों के बीच सन 1963 में हुआ था और सीमा चिह्नित करने वाले खंभे लगाए गए थे। लेकिन नेपाल की सीमा का उल्लंघन करते हुए चीन ने नेपाली क्षेत्र पर कब्जा कर वहां स्टील पाइप और तार की बाड़ लगा दी है। इतना ही नहीं चीन नेपाल की जमीन पर एक नहर भी बना रहा है जिससे वह अपने कब्जे वाले इलाके में जलापूर्ति सुनिश्चित कर सके। ऐसा वह नेपाल पुलिस की आपत्ति को दरकिनार करते हुए कर रहा है। चीनी सैनिक कब्जे वाले इलाके के आसपास नेपाली लोगों और उनके जानवरों को भी नहीं आने दे रहे हैं।