बीजिंग, एजेंसियां: बीते चार साल में चीन की वैश्विक छवि में लगातार गिरावट आई है। अमेरिका, जापान, अफ्रीका और पूर्व यूरोपीय देशों में चीन की छवि बिगड़ी है। प्रमुख देश चीन के साथ सहयोग बढ़ाने में कतराने लगे हैं। पीयू रिसर्च सेंटर की ताजा रिपोर्ट बताती है कि बीती सदी के आखिरी और चालू सदी के शुरुआती दशक में चीन ने जिस प्रकार से दुनिया के प्रमुख देशों के साथ सहयोग बढ़ाया, हाल के वर्षो में उसमें गिरावट आई है।

विश्व में चीन के कार्यों और नीतियों को लेकर शक बढ़ा है। कोरोना संक्रमण काल में यह शक और बढ़ गया जिससे उसकी छवि बिगड़ी। चीन ने वन बेल्ट-वन रोड अभियान के तहत दर्जनों विकासशील देशों में आधारभूत सुविधाओं का विकास किया और कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट व अन्य संस्थाओं के जरिये सांस्कृतिक संबंध विकसित किए। लेकिन उन सबसे उसकी नकारात्मक मंशा ही उजागर हुई और छवि बिगड़ी।

विकासशील देशों को कर्ज के जाल में फंसाने, तकनीक चोरी, मुद्रा अवमूल्यन कर अर्थव्यवस्था का विकास करने, हांगकांग व तिब्बत में मानवाधिकारों का उल्लंघन और शिनजियांग में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के ऐसे मामले हैं जिनसे चीन घिरता चला गया। इन मामलों में उसके तर्क अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेमानी साबित हुई और उसकी छवि निरंतर बिगड़ी।

चीन का सैन्य विकास और पड़ोसी देशों को धमकाने व उनके क्षेत्र पर कब्जा करने की नीति से भी उनकी छवि बिगड़ी है। इस सबके चलते उसके खिलाफ देशों की एकजुटता बढ़ी है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) और सोवियत संघ के बीच बने शीतयुद्ध के वातावरण बाद अब चीन के खिलाफ वैसा ही माहौल बनता नजर आ रहा है।

अमेरिका सहित 17 अलग-अलग देशों में जनता के प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वेक्षण के अनुसार, चीन को लेकर प्रतिकूल राय ऐतिहासिक ऊंचाई पर है। सर्वेक्षण की गई औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं के विशाल बहुमत में चीन की काफी हद तक प्रतिकूल राय थी। दुनिया भर में चीन की बिगड़ती छवि के कई कारण हैं। इनमें कमजोर कूटनीति, आर्थिक दबाव का बढ़ता उपयोग, सॉफ्ट पावर के असफल प्रयास और रूस के साथ संबंधों का विस्तार शामिल है।

Edited By: Amit Singh