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Russia Ukraine War: चीन बना रूस-यूक्रेन शांति का पैरोकार, पुतिन और जेलेंस्की दोनों से बात करेंगे शी चिनफिंग

रूस-यूक्रेन युद्ध में चीन की भूमिका अब तक इस विवाद से अलग रहने और किसी भी तरह रूस की आलोचना से बचने की रही है लेकिन अब चीन ने इच्छा जताई है कि दोनों देश शांति वार्ता आयोजित करें और विवाद का समाधान निकालने की कोशिश करें। File Photo

By AgencyEdited By: Devshanker ChovdharyPublished: Thu, 16 Mar 2023 09:43 PM (IST)Updated: Thu, 16 Mar 2023 09:43 PM (IST)
Russia Ukraine War: चीन बना रूस-यूक्रेन शांति का पैरोकार, पुतिन और जेलेंस्की दोनों से बात करेंगे शी चिनफिंग
Russia Ukraine War: चीन बना रूस-यूक्रेन शांति का पैरोकार

बीजिंग, रायटर। रूस-यूक्रेन युद्ध में चीन की भूमिका अब तक इस विवाद से अलग रहने और किसी भी तरह रूस की आलोचना से बचने की रही है, लेकिन अब चीन ने इच्छा जताई है कि दोनों देश शांति वार्ता आयोजित करें और विवाद का समाधान निकालने की कोशिश करें। चीन के वरिष्ठ राजनयिक किन गैंग ने गुरुवार को यूक्रेन के विदेश मंत्रालय अधिकारी से फोन पर बातचीत की।

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चीन ने सुझाए शांति के 12 सूत्र

चीन ने दोनों पक्षों से आग्रह किया है कि दोनों देश "यूक्रेन संकट के राजनीतिक समाधान" पर इसके 12-सूत्रीय शोधपत्र में वर्णित समग्र युद्धविराम के लिए धीरे-धीरे तनाव घटाने पर सहमत हों। शोधपत्र में नागरिकों की सुरक्षा और एक दूसरे की संप्रभुता के सम्मान का आह्वान किया गया है।

चीन की इस योजना पर दोनों ही देशों ने ही ज्यादा गर्मजोशी नहीं दिखाई है। चीन के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, किन ने यूक्रेन के विदेश मंत्री दमित्रो कुलेबा से कहा कि चीन को उम्मीद है कि सभी पक्ष शांत, तर्कसंगत और संयमित रहेंगे और शीघ्र ही शांति वार्ता फिर से शुरू करेंगे।

पुतिन और जेलेंस्की दोनों से बातचीत करेंगे शी चिनफिंग

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग अगले सप्ताह रूसी व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर सकते हैं। ऐसी उम्मीद है कि वह यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से भी वर्चुअल मीटिंग करेंगे। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी उम्मीद कम है कि चीन रूस और यूक्रेन को बातचीत के लिए तैयार कर पाएगा, फिर भी कुछ विश्लेषक मानते हैं कि बातचीत प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए शी पर्दे की पीछे भूमिका निभा सकते हैं।

बता दें कि चीन ने सीधे रूस की सहायता करने से परहेज किया है, लेकिन चीन की कई कंपनियों पर ऐसे आरोप लगे हैं कि वे रूस को सैन्य साजो-सामान मुहैया करवा रही है। ऐसा माना जाता है कि चीनी सरकारी की मौन सहमति के बिना ऐसा होना संभव नहीं है।


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