बीजिंग, पीटीआइ। भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और जापान ने मिलकर जब से क्वाड का गठन किया है तब से चीन बौखलाया हुआ है। शुक्रवार को अमेरिका में क्वाड के पहले शिखर सम्मेलन से तिलमिलाए चीन ने इसको लेकर फिर अपनी भड़ास निकाली। उसने कहा कि इस संगठन का असफल होना निश्चित है।

व्‍यक्तिगत मौजूदगी वाला पहला शिखर सम्मेलन

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने व्हाइट हाउस में क्वाड के पहले शिखर सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें उनके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्काट मारीसन और जापान के प्रधानमंत्री योशीहिंदे सुगा शामिल हुए। व्यक्तिगत उपस्थिति वाला यह पहला शिखर सम्मेलन है।

हितों को लक्षित ना करें 

इससे पहले मार्च में डिजिटल माध्यम से शिखर सम्मेलन हो चुका है। क्वाड के पहले शिखर सम्मेलन के बारे में पूछे जाने पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि चार देशों के समूह को किसी तीसरे देश और उसके हितों को लक्षित नहीं करना चाहिए।

क्‍वाड का असफल होना निश्‍च‍ित 

झाओ ने कहा कि चीन का हमेशा से यह मानना रहा है कि किसी तीसरे देश के खिलाफ छोटा गठबंधन बनाना समय के प्रवाह और क्षेत्र के देशों की आकांक्षा के खिलाफ है। ऐसे गठजोड़ को समर्थन नहीं मिलेगा और उसका असफल होना निश्चित है। दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावे का बचाव करते हुए झाओ ने कहा, 'चीन विश्व शांति का निर्माता, वैश्विक विकास का योगदानकर्ता और विश्व व्यवस्था का धारक है।'

द्विपक्षीय संबंधों के लिए यह सबकुछ नहीं

बीजिंग में चीन ने क्वाड को लेकर अपनी खिसियाहट दिखाई तो नई दिल्ली में उसके राजदूत ने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर नसीहत दे डाली। पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच जारी सैन्य गतिरोध के बीच चीनी राजदूत सुन वीडांग ने कहा कि भारत के साथ सीमा पर शांति और सौहार्द महत्वपूर्ण है, लेकिन द्विपक्षीय संबंधों में यह सबकुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि संबंधों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट रूप से दोनों पक्षों के मौलिक हित में नहीं है।