बीजिंग, प्रेट्र। हांगकांग मामले में अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के दखल से चीन भड़क गया है। उसने हांगकांग की विधायी परिषद में घुसने वाले प्रदर्शनकारियों को किसी भी तरह का भ्रामक संकेत देने को लेकर ईयू और इन देशों को आगाह किया है। चीन ने कहा कि वह देश के आतंरिक मामलों में इनके हस्तक्षेप का सख्ती से विरोध करता है।

हांगकांग की विधायी परिषद में सोमवार को प्रदर्शनकारी घुस गए थे और घंटों कब्जा जमाए रखा था। इस दौरान उन्होंने फर्नीचर आदि को नुकसान पहुंचाया और दीवारों पर नारे लिख दिए। आरोपितों को चीन प्रत्यर्पित करने वाले प्रस्तावित कानून के खिलाफ पिछले तीन हफ्ते से हांगकांग में विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। ब्रिटेन ने एक जुलाई, 1997 को हांगकांग इस शर्त के साथ चीन को सौंपा था कि वह इसकी स्वायत्तता को बरकरार रखेगा।

सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, चीन के हांगकांग और मकाऊ मामलों के दफ्तर के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि प्रदर्शनकारियों के विधायी परिषद की इमारत में घुसने की कड़ी निंदा की जाती है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को अति कट्टरपंथी करार दिया।

प्रवक्ता ने कहा कि हांगकांग की सरकार और पुलिस जिस तरह इन घटनाओं से निपट रही है, चीन उसका समर्थन करता है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी हांगकांग में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के समर्थन को लेकर अमेरिका, ब्रिटेन और ईयू के बयान पर कड़ा एतराज जताया है।

मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, 'मैं यह दोहराना चाहूंगा कि हांगकांग चीन का विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है और इसका मामला पूरी तरह आंतरिक है। हम चीन के मामले में इन देशों के दखल का विरोध करते हैं।' अमेरिका, ब्रिटेन और ईयू ने कहा है कि हांगकांग के लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने हालांकि हिंसा से बचने का आग्रह भी किया है।

हांगकांग की आजादी से कोई समझौता नहीं

ब्रिटेन ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि वह हांगकांग की आजादी को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं से कोई समझौता नहीं करेगा। इसके साथ ही उसने चीन को आगाह किया है कि दमन से हांगकांग संकट का समाधान नहीं हो सकता। ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेरमी हंट ने कहा, 'हम अपने मूल्यों के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे।'

Posted By: Nitin Arora

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