क्वेटा, एजेंसी।  चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर चीन की गतिविधियों पर बलूचिस्तान ने  कड़ा रुख अपनाया है। बलूच अलगाववादी नेता ने  चीन से बलूचिस्तान में CPEC परियोजना को रोकने के लिए कहा है। दरअसल इस परियोजना के कारण वहां के लाखों लोग  जबरन विस्थापित किए गए और उनकी संपत्तियां भी बर्बाद हो गईं। 

करोड़ों डालर की  CPEC परियोजना हाइवे और रेलवे नेटवर्क का एक प्रोजेक्ट है जिसका विस्तार पाकिस्तान में होगा। यह परियोजना बलूचिस्तान के ग्वादर समुद्री बंदरगाह तक है जहां चीन व अन्य विदेशी निवेश किए गए हैं। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख डा. अल्लाह नजर बलूच ने वीडियो संदेश में कहा, 'बलूच की ओर से मैं चीन को बताना चाहता हूं कि आपको पाकिस्तान का पार्टनर बनने से बचना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि चीन यहां निवेश करना चाहता है तो उसे तब तक इंतजार करना हो जब तक बलूच को अपना संप्रभु देश नहीं मिल जाता और बीजिंग समझौते और व्यापार पर समझौता करने की स्थिति में न हो।

नाएला कादरी बलूच ने हाल में ही कहा था कि बलूचिस्तान के लिए CPEC मौत की सजा है।  यह एक आर्थिक परियोजना नहीं है बल्कि एक सैन्य परियोजना है। किसी भी देश को बलूच बंदरगाहों को बेचने का अधिकार नहीं है। वे हमें चीनी और पाकिस्तानी बस्तियों के निर्माण के लिए हमारी पुश्तैनी जमीन से विस्थापित कर रहे हैं।

बलोच कार्यकर्ताओं ने अपनी एक निर्वासित सरकार बनाई है। इसके साथ ही अब इसके समर्थन जुटाने के लिए अलग-अलग राष्ट्रों से समर्थन मांग रहे हैं जिसके तहत अब बलोच कार्यकर्ता भारत से भी समर्थ जुटा रहे हैं। इससे पहले भारत ने भी बलूचिस्तान में चल रहे संघर्ष और पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों की आलोचना की है। 

Edited By: Monika Minal