न्यूयार्क [द न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स]। दुनिया भर में लाखों लोगों को जान लेने और करोड़ों लोगों को गंभीर रूप से बीमार बनाने वाले कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता करने के लिए जिस तरह अमेरिका समेत दुनिया के अनेक देशों ने दबाव बनाना शुरू किया है उसके बाद चीन की वुहान लैब और चीन की वाइरोलाजिस्ट शी झेंगली का नाम फिर सुर्खियों में है। चीन की 'बैटवूमैन' के नाम से कुख्यात शी ने इस मामले में चुप्पी तोड़कर अपनी सफाई पेश की है।

चीन में नायक का रुतबा

चमगादड़ों पर लंबा शोध करने वाली शी झेंगली को उनके देश की जनता और सरकार 'नायक' मानती है। उनका मानना है कि शी के प्रयासों से चीन में कोरोना का विस्तार रोकने में मदद मिली। वहीं दुनिया के दूसरे हिस्सों में माना जाता है कि 57 वर्षीय झेंगली ही कहीं न कहीं इस वायरस को घातक बनाने और फैलाने की जिम्मेदार हैं।

ट्रंप उठा चुके हैं चीन पर सवाल

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना के लिए खुलेआम चीन पर आरोप लगाते रहे हैं। वहीं बाइडन प्रशासन ने अपनी जांच एजेंसियों को कोरोना की उत्पत्ति का निश्चित समय सीमा में पता लगाने का आदेश देकर चीन पर संदेह गहरा कर दिया है। कई और देशों ने चीन की वुहान लैब से ही वायरस लीक होने की आशंका जाहिर कर मामले को गंभीर बना दिया है। हालांकि चीन शुरू से ऐसी किसी भी आशंका से साफ इन्कार करता आ रहा है।

डाटा सार्वजनिक करने की मांग

विज्ञानियों का मानना है झेंगली ने चमगादड़ों पर कुछ ऐसे प्रयोग किए जिनसे कोरोना का वायरस इतना घातक हो गया। उन्होंने वुहान लैब के कुछ विज्ञानियों के इस बीमारी की चपेट में आकर जान गंवाने पर चीन से सफाई मांगी है। विज्ञानियों ने जांच दल को पूरी छूट देने के साथ इस लैब में चमगादड़ों पर हो रहे शोध का सारा डाटा सार्वजनिक करने की मांग की है।

शी झेंगली ने कही यह बात

इस सिलसिले में शी झेंगली से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने इस तरह के आरोप से साफ इन्कार कर दिया। उन्होंने ईमेल के जरिये एक साक्षात्कार में कहा कि मैं यह समझ नहीं पा रही हूं कि दुनिया इस निष्कर्ष पर कैसे पहुंच गई कि कोरोना के लिए मैं या मेरे देश की लैब जिम्मेदार है।

चीन ने नहीं दी स्वतंत्र जांच की अनुमति

शी अपनी सफाई में भले ही कितने ही तर्क गढ़ें लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि चीन की सरकार ने अभी तक किसी भी जांच दल को वुहान स्थित लैब की स्वतंत्र जांच की अनुमति नहीं दी है।

वुहान लैब तक नहीं हो पाई पहुंच

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दबाव में उसने एक अंतरराष्ट्रीय टीम को अपने देश में आने की अनुमति जरूर दी लेकिन वह भी वुहान लैब तक नहीं पहुंच सकी। इस टीम ने बाद में गोलमोल रिपोर्ट देकर जांच की खानापूरी कर दी। इस टीम के निष्कर्षों से डब्ल्यूएचओ के मुखिया टेड्रोस एडहैनम घेब्रयेसिस भी बहुत प्रभावित नहीं हुए।

ऐसे शुरू किया था करियर

आधिकारिक चीनी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शी ने 1990 में एक शोध सहायक के रूप में करियर की शुरुआत की। उन्होंने सन 2000 में फ्रांस में मोंटपेलियर विश्वविद्यालय से पीएचडी की और 2004 में गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम (सार्स) के प्रकोप के बाद चमगादड़ों पर शोध शुरू किया। शी के योगदान के लिए 2019 में अमेरिकन एकेडमी आफ माइक्रोबायोलॉजी ने उन्हें चुनिंदा 109 विज्ञानियों में शामिल किया था।