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देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने प्रवासी भारतीय: वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में भारत को मिला 150.7 अरब डॉलर का रिकॉर्ड रेमिटेंस

Published: Thu, 05 Nov 2026 11:01 PM (IST)

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 2025 में रिकॉर्ड 150.7 अरब डॉलर का रेमिटेंस प्राप्त हुआ, जो देश की आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

भारत को 2025 में 150.7 अरब डॉलर का रिकॉर्ड रेमिटेंस मिला

भारत को 2025 में 150.7 अरब डॉलर का रिकॉर्ड रेमिटेंस मिला

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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट भारत के शौर्य, सामर्थ्य और दुनिया भर में फैले उसके प्रवासियों की अटूट राष्ट्रनिष्ठा का एक और स्वर्णिम अध्याय लेकर आई है। वर्ष 2025 के लिए जारी 'इंटरनेशनल डेट रिपोर्ट 2026' के अनुसार, भारत को कुल 150.7 अरब डालर का रेमिटेंस (विदेश से भेजा गया धन) प्राप्त हुआ है।

यह आंकड़ा न केवल भारत की वैश्विक आर्थिक ताकत को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सात समंदर पार मेहनत करने वाला हर भारतीय नागरिक अपनी मातृभूमि के प्रति पूरी तरह समर्पित है।

भारत को 2025 में 150.7 अरब डॉलर का रिकॉर्ड रेमिटेंस मिला

यह आंकड़ा देश में आए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश यानी एफडीआइ (35 अरब डॉलर) से चार गुना से भी अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत से 18.5 अरब डॉलर का नेट पोर्टफोलियो इक्विटी आउटफ्लो (पूंजी बहिर्गमन) दर्ज किया गया, लेकिन प्रवासियों द्वारा भेजे गए धन ने देश की अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व स्थिरता प्रदान की।

वैश्विक मंच पर भारत की यह उपलब्धि अद्वितीय है। विश्व बैंक की उधार देने वाली शाखा - इंटरनेशनल बैंक फार रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (आइबीआरडी) के कर्जदार देशों में भारत रेमिटेंस वृद्धि का सबसे बड़ा चालक बनकर उभरा है।

इस मामले में भारत ने अन्य देशों को मीलों पीछे छोड़ दिया है। इस फेहरिस्त में दूसरे स्थान पर रहे मैक्सिको को 65.1 अरब डालर प्राप्त हुए, जो भारत की कुल प्राप्ति से आधे से भी कम हैं।

दक्षिण एशिया की तस्वीर पर नजर डालें तो क्षेत्र को वर्ष 2025 में कुल 207.6 अरब डालर रेमिटेंस प्राप्त हुआ, जिसमें अकेले भारत की हिस्सेदारी लगभग 73 प्रतिशत रही। यह इस बात का प्रमाण है कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में आर्थिक स्पंदन की धुरी पूरी तरह से भारत के इर्द-गिर्द घूमती है।

वैश्विक स्तर पर भी तस्वीर तेजी से बदल रही है। चीन को छोड़कर अन्य सभी निम्न और मध्यम आय वाले देशों में वर्ष 2025 के दौरान रेमिटेंस बढ़कर 687.1 अरब डालर पर पहुंच गया, जबकि इसी अवधि में इन देशों को कुल 333.5 अरब डॉलर का ही एफडीआइ मिल सका।

विश्व बैंक रिपोर्ट के अनुसार भारत रेमिटेंस वृद्धि का चालक

वर्ष 2011 में रेमिटेंस और एफडीआइ लगभग बराबर (313.3 अरब डालर और 316.6 अरब डालर) हुआ करते थे, लेकिन पिछले एक दशक में जहां रेमिटेंस दोगुने से अधिक हो गए, वहीं एफडीआइ में मात्र 5.3 प्रतिशत की ही वृद्धि दर्ज की गई।

हालांकि, विश्व बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि रेमिटेंस और एफडीआइ एक-दूसरे के पूरक नहीं बल्कि अलग वित्तीय स्रोत हैं। जहां रेमिटेंस सीधे परिवारों की आय को संबल देकर घरेलू खपत और विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिरता प्रदान करते हैं, वहीं प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआइ) उत्पादक क्षमता, रोजगार सृजन और तकनीकी हस्तांतरण में सहायक होता है।

इसके बावजूद, ब्राजील, भारत, इंडोनेशिया, मेक्सिको और वियतनाम जैसे देशों का दबदबा कायम है, जिन्होंने मिलकर चीन को छोड़कर अन्य विकासशील देशों के कुल एफडीआइ का 52.7 प्रतिशत हिस्सा अपने नाम किया।

रिपोर्ट में भारत के कुल बाहरी कर्ज का भी विवरण दिया गया है, जो वर्ष 2025 के अंत तक 6.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 763.5 अरब डालर दर्ज किया गया। इसमें 275.6 अरब डालर सार्वजनिक और सार्वजनिक रूप से गारंटीकृत कर्ज, 337.2 अरब डालर निजी गैर-गारंटीकृत कर्ज और 150.8 अरब डालर का अल्पकालिक कर्ज शामिल है।

यह रिपोर्ट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह विदेशों में पसीना बहाने वाले उन करोड़ों भारतीयों के त्याग, परिश्रम और राष्ट्र-प्रेम का जीवंत दस्तावेज है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी माटी से नाता नहीं तोड़ा और देश की आर्थिक रीढ़ को निरंतर मजबूत बनाए रखा है।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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