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ट्रंप को लगा चुनावी झटका: क्या ईरान, इजरायल और यूक्रेन पर होगा चुनाव हार का असर? दुनिया को इंतजार

Published: Fri, 06 Nov 2026 02:00 AM (IST)

ईरान ट्रंप को मध्यावधि चुनाव में लगे झटके का जश्न मना रहा है, लेकिन आगे की स्थिति के लिए तैयार ...और पढ़ें

ट्रंप को लगे चुनावी झटके का ईरान, इजरायल और यूक्रेन पर असर का दुनिया को इंतजार

ट्रंप को लगे चुनावी झटके का ईरान, इजरायल और यूक्रेन पर असर का दुनिया को इंतजार

HighLights

  1. ईरान ट्रंप की हार का मना रहा जश्न, लेकिन शांति की गारंटी नहीं

  2. अमेरिका और इजरायल संबंधों में हो सकता है एक युग का अंत

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के नतीजों का असर उसकी सीमाओं से कहीं आगे तक हो सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब दो वर्षों में अमेरिकी विदेश नीति की दशकों पुरानी परिपाटी बदल दी है और सहयोगियों के साथ-साथ विरोधियों को भी असहज किया है।

दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि संसद पर डेमोक्रेट्स के नियंत्रण का क्या असर होता है। ट्रंप तेहरान के साथ समझौते की राह चुनते हैं या युद्ध को और बढ़ाते हैं, इजरायल के लिए अमेरिका का समर्थन कितना घटता है और युद्ध खत्म करने के लिए शर्तें मानने को लेकर वह यूक्रेन पर कितना दबाव डालते हैं।

ईरान ट्रंप को मध्यावधि चुनाव में लगे झटके का जश्न मना रहा है, लेकिन आगे की स्थिति के लिए तैयार भी है। ईरान यह उम्मीद नहीं कर रहा कि अमेरिका अपनी नीति बदलेगा।

सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने कहा कि जो कोई भी यह मानता है कि नतीजों से अमेरिकी नीति बदलेगी, वह गहरी गलतफहमी में है। अधिकारियों का कहना है कि ईरान की रणनीति अमेरिकी चुनावों पर निर्भर नहीं है। वे कूटनीति तेज करने के साथ-साथ और युद्ध की तैयारी कर रहे हैं।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के अली वॉएज ने सीएनएन से कहा, 'ईरान का युद्ध उनके गले की हड्डी बन गया है। ट्रंप के सामने स्पष्ट विकल्प है- चेहरा बचाने वाला समझौता करके जीत का एलान करें या सैन्य कार्रवाई और तेज करें। खतरा यह है कि चुनाव में कमजोर पड़े राष्ट्रपति रणभूमि में अपनी प्रतिष्ठा बहाल करने की कोशिश कर सकते हैं।

अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की जीत
इजरायल के लिए यह खतरे की घंटी है। अमेरिका में इजरायल को द्विदलीय समर्थन पहले से ही घट रहा था। गाजा युद्ध में मौतों को लेकर डेमोक्रेट्स में इजरायल के विरुद्ध नाराजगी थी, जबकि ऐसे रिपब्लिकनों की संख्या बढ़ रही है जो मानते हैं कि अमेरिका ने उसे जरूरत से ज्यादा समर्थन दिया है।

अमेरिका में इजरायल के पूर्व राजदूत माइकल ओरेन ने कहा, फिलहाल इजरायल की आलोचना ही एकमात्र ऐसा मुद्दा है जिस पर दोनों दल सहमत हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सहायता का अंत उस प्रक्रिया की बस शुरुआत है जो अभी आकार ले रही है।

संभव है कि अमेरिका इजरायल के साथ खुफिया जानकारी साझा करना और महत्वपूर्ण सैन्य प्रणालियों का संयुक्त विकास भी बंद कर दे। इनमें बहुचर्चित आयरन डोम हवाई रक्षा प्रणाली भी शामिल है। उन्होंने कहा, 'हम एक युग के अंत पर हैं।'

ईरान युद्ध के दौरान इजरायल-विरोधी भावना और मजबूत हुई। अमेरिकी मतदाताओं के कुछ वर्गों ने अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों को ऐसा युद्ध माना जिसे नेतन्याहू ने ट्रंप पर लाद दिया था। उधर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को उम्मीद है कि डेमोक्रेट्स रूस के विरुद्ध यूक्रेन की रक्षा के लिए अमेरिकी समर्थन मजबूत करेगी।

जेलेंस्की ने कहा, 'मैं रिपब्लिकन का भी आभारी हूं, लेकिन डेमोक्रेट्स यूक्रेन का समर्थन करने और उसे सहायता देने के बारे में बहुत स्पष्ट रूप से बात करते हैं। वे अमेरिका और यूरोप के बीच संबंध फिर से मजबूत करने की बात करते हैं… इसलिए उम्मीद है कि शक्ति संतुलन बनेगा और हमें ज्यादा समर्थन मिलेगा।

अगर अमेरिकी संसद अब मजबूत वित्तीय समर्थन या सैन्य सहायता की बात करती है, जैसा कि यूरोप आज कर रहा है और दिखा रहा है, तो यह सकारात्मक होगा और इसका असर पुतिन पर पड़ेगा।'

गौरतलब है कि कई सप्ताह से जेलेंस्की के साथ ट्रंप के संबंध तेजी से बिगड़े हैं। ट्रंप ने जेलेंस्की को हटाने की मांग की है और रूस के फायदे वाले ऊर्जा समझौतों की कोशिश की है।

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