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ईरान युद्ध से कई मोर्चों पर कमजोर पड़ा अमेरिका, रूस और चीन की चांदी; समझिए कैसे?

Published: Mon, 13 Apr 2026 07:00 AM (IST)

ईरान युद्ध और संघर्षविराम ने वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित किया है, जिससे अमेरिका कई मोर्चों पर कमजोर हुआ है। ...और पढ़ें

ईरान से युद्ध कर ट्रंप ने रूस और चीन की कर दी चांदी। (फाइल फोटो)

ईरान से युद्ध कर ट्रंप ने रूस और चीन की कर दी चांदी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. मध्य पूर्व में अमेरिकी प्रभाव और विश्वसनीयता को झटका लगा।

  2. युद्ध ने अमेरिका के रणनीतिक फोकस को एशिया से भटकाया।

  3. ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से रूस को आर्थिक लाभ मिला।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान के साथ हालिया युद्ध और उसके बाद लागू 14 दिन के संघर्षविराम ने वैश्विक शक्ति संतुलन को नए सिरे से प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस संघर्ष ने 21वीं सदी की महाशक्ति प्रतिस्पर्धा में अमेरिका की स्थिति को कई मोर्चों पर कमजोर किया है, जबकि चीन और रूस को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला है।

सबसे पहले, मध्य पूर्व में अमेरिकी प्रभाव को झटका लगा है। लंबे समय से इस क्षेत्र में सुरक्षा गारंटर की भूमिका निभाने वाले अमेरिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। खाड़ी देशों- जैसे सऊदी अरब, यूएई और कतर- अब वैकल्पिक सुरक्षा और आर्थिक साझेदारों की तलाश कर सकते हैं, जिससे चीन और रूस की क्षेत्रीय पकड़ मजबूत होने की संभावना है।

फोकस से भटका अमेरिका

चीन पहले ही सऊदी अरब और ईरान के बीच संबंध बहाली में मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है, जबकि रूस ने सीरिया और ईरान के साथ अपने संबंधों के जरिए क्षेत्र में प्रभाव बनाए रखा है।

दूसरा, इस युद्ध ने अमेरिका के रणनीतिक फोकस को भटका दिया है। ट्रंप प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति एशिया-प्रशांत और पश्चिमी गोलार्ध पर केंद्रित थी, लेकिन ईरान के साथ संघर्ष ने संसाधनों और ध्यान को फिर मध्य पूर्व की ओर मोड़ दिया। इससे न केवल अन्य प्राथमिकताएं प्रभावित हुईं, बल्कि नाटो सहयोगियों के साथ भी मतभेद उभरे, जिसका लाभ चीन और रूस उठा सकते हैं।

रूस को मिला राजस्व का लाभ

तीसरा, आर्थिक असर अमेरिका के लिए अपेक्षाकृत अधिक नुकसानदेह रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है, के बाधित होने से ऊर्जा कीमतों में उछाल आया।

इससे रूस को अपने ऊर्जा निर्यात से अतिरिक्त राजस्व मिला, जबकि अमेरिका में ईंधन महंगाई और आपूर्ति संकट का दबाव बढ़ा। चीन, जिसने ऊर्जा स्त्रोतों में विविधता और घरेलू भंडारण को मजबूत किया है, इस झटके को अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से झेलने की स्थिति में दिखा।

नेतृत्व छवि को पहुंचा नुकसान

चौथा और सबसे महत्वपूर्ण, अमेरिका की वैश्विक नेतृत्व छवि को नुकसान पहुंचा है। युद्ध के दौरान ट्रंप प्रशासन की आक्रामक नीति और विरोधाभासी बयानबाजी ने उसे विश्वसनीय मध्यस्थ की भूमिका से दूर कर दिया। इसके विपरीत, चीन ने संघर्षविराम को प्रोत्साहित कर खुद को एक उभरते वैश्विक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश की।

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