वाशिंगटन, आइएएनएस। अमेरिका और रूस के बीच इन दिनों कई मुद्दों पर ठनी हुई है। इसमें काला सागर का मुद्दा भी शामिल है, जहां रूस की बढ़ती मौजूदगी को लेकर अमेरिका चिंतित है और इससे निपटने के लिए अमेरिकी नौसेना ने भी अपनी उपस्थिति बढ़ाने का फैसला किया है। ऐसे में काफी समय बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब अमेरिका ने अपने दो युद्धपोतों को काला सागर में तैनात किया है। 'सीएनएन' से बातचीत में एक अमेरिकी सेना अधिकारी ने इसका खुलासा किया है।

रूस ने क्षेत्र में सुरक्षा बलों को किया मजबूत

आपको बता दें कि मौजूदा समय में काला सागर क्षेत्र में काफी तेजी से तनाव बढ़ा है। 2014 में यूक्रेन से क्रीमिया पर कब्‍जा के बाद रूस ने इस क्षेत्र में अपने सुरक्षा बलों को मजबूत किया है। हालांकि रूस के इस कदम का बड़े पैमाने पर अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय ने विरोध किया। अमेरिका भी इसमें शामिल है और अब उसने इस चिंताजनक स्थिति से निपटने का फैसला किया है।

अमेरिका ने तैनात किए एक साथ दो युद्धपोत

अमेरिकी नौसेना के छठे बेड़े के एक बयान के अनुसार, समुद्री सुरक्षा अभियान के संचालन के लिए बीते शुक्रवार को अर्ले बर्के श्रेणी के निर्देशित मिसाइल विध्‍वसंक यूएसएस कार्नी ने यूएसएस रॉस को काला सागर में ज्‍वाइन किया है। गौरतलब है कि अमेरिकी नौसेना का छठा बेड़ा काला सागर क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना अभियानों की निगरानी करता है। पिछले साल जुलाई के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब काला सागर में दो अमेरिकी नौसेना युद्धपोत मौजूद हैं।

रूस के इस नए एलान से बढ़ा क्षेत्र में तनाव

उधर, रूस ने बीते रविवार को काला सागर क्षेत्र में खुद की नौसेना तैनाती का एलान किया। रूसी रक्षा मंत्रालय ने अपने एक बयान में बताया कि कई अभ्‍यासों के लिए एक रूसी युद्धपोत एडमाइरल एसेन और दो निगरानी जहाजों ने काला सागर में प्रवेश किया है।

अमेरिकी सेना अधिकारी ने कहा कि काला सागर में कार्नी और रॉस दोनों युद्धपातों को तैनात करने का फैसला रूस को उस क्षेत्र में कमतर करने के प्रयास के तहत किया गया है। काला सागर पूर्वी यूरोप, काकेशस और पश्चिमी एशिया के बीच में स्थित है।

आमने-सामने आ गए थे दोनों देशों के विमान

पिछले महीने काला सागर में रूस के एसयू-27 विमान और अमेरिका के ईपी-3 विमान आमने-सामने आ गए थे और बाल-बाल टकराने से बचे। इसको लेकर अमेरिका ने कड़ी आपत्ति जताते हुए रूस को चेताया भी था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पूरे मामले पर जानकारी देते हुए कड़ा एतराज जताया था। मंत्रालस की प्रवक्‍ता हीथर नॉर्ट ने कहा कि काला सागर के ऊपर हवा में करीब 2 घंटे 40 मिनट तक दोनों देशों के विमान एक-दूसरे के आसपास घूमते रहे। इस दौरान रूसी विमान ने अमेरिकी विमान का रास्ता भी रोकने की कोशिश की। गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर में भी चीन और अमेरिका टकराते रहते हैं।

By Pratibha Kumari