वॉशिंगटन, एएनआइ। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी हुए अब करीब 2 महीने का समय होने वाला है। इस बीच अमेरिकी प्रशासन ने शुक्रवार को सांसदों को सूचित किया कि उनका अफगानिस्तान में सैन्य और खुफिया अभियानों के संचालन के लिए पाकिस्तान से उसके हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान के साथ एक समझौते को औपचारिक रूप देने के करीब है। सीएनएन ने कांग्रेस के सदस्यों के साथ वर्गीकृत ब्रीफिंग के विवरण से परिचित तीन स्रोतों का हवाला देते हुए इसकी जानकारी दी। सूत्रों में से एक ने कहा कि पाकिस्तान ने अपने खुद के आतंकवाद विरोधी प्रयासों में सहायता के बदले एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने की इच्छा व्यक्त की है। लेकिन इसको लेकर बातचीत अभी जारी है। हालांकि, एक अन्य सूत्र ने सीएनएन को बताया कि अमेरिका-पाकिस्तान के बीच समझौते की शर्तें, जिन्हें अंतिम रूप नहीं दिया गया है अभी भी बदल सकती हैं।

एक समझौते पर चर्चा हुई जब अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान का दौरा किया। तीसरे सूत्र ने सीएनएन को बताया, लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान क्या चाहता है या इसके बदले में अमेरिका कितना देने को तैयार होगा। वर्तमान में अमेरिका, अफगानिस्तान में चल रहे खुफिया-एकत्रीकरण तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का उपयोग करता है। अगर अमेरिका काबुल में अमेरिकी नागरिकों और देश में रहने वाले अन्य लोगों को बाहर निकालने के लिए उड़ानें फिर से शुरू करता है तो पाकिस्तान के माध्यम से अफगानिस्तान के लिए हवाई क्षेत्र और भी महत्वपूर्ण हो सकता है। अमेरिका - बिना किसी औपचारिक समझौते के पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के रास्ते में अपने सैन्य विमानों और ड्रोन में प्रवेश से इनकार करने का जोखिम उठाता है।

ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन में तनातनी

ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन की तनातनी बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने साफ कर दिया है कि चीन अगर ताइवान पर हमला करता है तो अमेरिका उसकी रक्षा करेगा। अमेरिका ताइवान की रक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। इस पर चीन का भी कहना है कि ताइवान के मुद्दे पर कोई समझौता या आम सहमति नहीं बन सकती है।

Edited By: Shashank Pandey