'कुंग फ्लू' से 'पांडा डिप्लोमेसी' तक... चीन पर यू-टर्न के बाद अमेरिका में ही ट्रंप की फजीहत
चिनफिंग के वाशिंगटन डीसी दौरे पर ट्रंप द्वारा दिए गए भव्य स्वागत ने सबको हैरान कर दिया। ट्रंप के चीन-विरोधी ...और पढ़ें

चीन पर यू-टर्न के बाद अमेरिका में ही ट्रंप की फजीहत(फोटो: रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग व्यापार, तकनीक, टैरिफ और वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य पर अहम बातचीत के लिए वॉशिंगटन डीसी पहुंचे थे। लेकिन इस द्विपक्षीय बातचीत से इतर, दुनिया को एक ऐसा नजारा देखने को मिला जो किसी हाउस-वार्मिंग पार्टी जैसा लग रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो मेजबान अपने खास मेहमान को प्रभावित करने की हर मुमकिन कोशिश में लगा हो।
अमेरिका में लोग शी चिनफिंग के इस जरूरत से ज्यादा शाही और दिखावटी स्वागत को देखकर हैरान भी हैं और सोशल मीडिया पर जमकर चुटकियां भी ले रहे हैं। विश्लेषक और आम जनता यह सवाल उठा रहे हैं कि ट्रंप के पुराने चीन-विरोधी तेवर और 'कुंग फ्लू' जैसे तीखे उपनाम अचानक कहां गायब हो गए, जिनका इस्तेमाल वे कोरोना महामारी के दौरान बीजिंग को घेरने के लिए लगातार करते रहे थे।
ट्रंप ने कराया शी को व्हाइट हाउस टूर
एक कमेंटेटर ने ट्रंप द्वारा शी के स्वागत की तुलना उस नौ साल के बच्चे से कर दी, जो अपने दोस्त को कमरे में लाकर लेगो सेट्स, वीडियो गेम्स और बंक बेड दिखाता है।
ओवल ऑफिस में भी कुछ ऐसा ही मंजर दिखा, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति ने शी को अपना सोने के रंग से सजा कमरा, प्रेसिडेंशियल हॉल ऑफ फेम और एक हेलीपैड दिखाया। इस पर एक व्यंग्यकार ने चुटकी लेते हुए कहा कि चीनी इंजीनियर ऐसा हेलीपैड दो दिन तो क्या, दो घंटे में ही खड़ा कर देते।
इस मुलाकात पर अमेरिकी कमेंटेटरों ने कई अन्य तीखे तंज भी कसे। एक ने कहा कि ट्रंप उस मां की तरह दिख रहे थे, जो अपनी बड़ी बेटी के लिए एक आदर्श रिश्ता तय करने को बेताब हो।
वहीं, जब ट्रंप खुद शी की अगवानी करने एयरपोर्ट पहुंचे, तो सोशल मीडिया पर इसे उबर ट्रंप नाम दे दिया गया, जिसका आशय था कि जब खुद राष्ट्रपति ड्राइवर बनकर आ जाएं, तो किसी कैब सर्विस की क्या जरूरत।
कई विश्लेषकों ने तो यहां तक पूछ लिया कि क्या ट्रंप ने शी को रात बिताने के लिए चप्पलें दीं, तकिए पर गुलाब बिखेरे और गेस्ट वाई-फाई का पासवर्ड भी साझा किया।
चिनफिंग की सधी हुई कूटनीतिक दूरी
अमेरिकी राष्ट्रपति के इतने भारी दिखावे के बावजूद शी चिनफिंग ने एक सधी हुई कूटनीतिक दूरी बनाए रखी। वे व्हाइट हाउस के ठीक सामने स्थित पारंपरिक 'ब्लेयर हाउस' में नहीं रुके, जो आमतौर पर राजकीय अतिथियों के लिए आरक्षित रहता है और जहां वे अपनी 2015 की यात्रा के दौरान ठहरे थे।
इसके बजाय उन्होंने पास ही स्थित वॉल्डोर्फ एस्टोरिया में ठहरना चुना। दिलचस्प बात यह है कि यह संपत्ति पहले खुद ट्रंप का ही एक लग्जरी होटल हुआ करती थी।
लेट-नाइट शोज में मजाक
मजाक का सिलसिला औपचारिक बैठक से पहले ही शुरू हो चुका था। एयरपोर्ट पर ऊपर से गुजरते अमेरिकी बॉम्बर विमानों के कानफोड़ू शोर पर ट्रंप के चौंकने वाले चेहरे पर खूब मीम्स बने।
द डेली शो की डेसी लिडिक ने कहा कि ट्रंप उन्हें खुद लेने एयरपोर्ट गए, इसे कहते हैं सच्ची दोस्ती, क्योंकि वे तो अपने बच्चे को भी कभी एयरपोर्ट लेने नहीं जातीं। उन्होंने आगे कहा कि विमान की आवाज से ट्रंप का सहमना वैसा ही था, जैसे कोई बच्चा अपनी ही आवाज से चौंक जाए।
वहीं, जिमी किमेल ने तंज कसते हुए कहा कि जो शख्स हमेशा चीन पर आग बबूला रहता था, आज वही 'हेयरमैन माओ' उनकी इतनी आवभगत कर रहा है। जिमी फैलन ने स्टेट डिनर के शानदार एशियन-फ्यूजन मेन्यू की तुलना ट्रंप के पसंदीदा फास्ट-फूड दो बिग मैक, बड़े फ्राइज और डाइट कोक से कर दी।
किमेल ने यह भी कहा कि चीन का अमेरिका को पांडा गिफ्ट करना एक बुरा विचार है, क्योंकि शायद ट्रंप उन्हें ही खा जाएं। फैलन ने चुटकी लेते हुए कहा कि ट्रंप की आवभगत देखकर लगता है मानो मशहूर कैनेडी सेंटर का नाम अब शी कैनेडी सेंटर हो गया है।
दिखावे की चकाचौंध में दबे वास्तविक कूटनीतिक मुद्दे
सोशल मीडिया से लेकर टीवी टॉक-शोज तक, पूरा विमर्श कुछ गिने-चुने बिंदुओं के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा। इसमें ट्रंप के पिछले चीन-विरोधी बयानों और वर्तमान अति-उत्साही रवैये के बीच का बड़ा फर्क सबसे प्रमुख रहा।
इसके अलावा व्यापारिक मतभेदों जैसे गंभीर मुद्दों को दरकिनार कर सतही दिखावे पर ज्यादा ज़ोर देना और महंगे राजकीय भोजन बनाम ट्रंप की निजी खान-पान की पसंद भी चर्चा का विषय बने रहे।
आलोचकों का मानना है कि यह द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन किसी ठोस वैश्विक कूटनीति के बजाय एक भव्य पर्सनल पीआर शो बनकर रह गया। जैसा कि कॉमेडियन सेठ मेयर्स ने टिप्पणी की, चीन के नागरिक भी शायद शी चिनफिंग की इतनी तारीफ नहीं करते होंगे जितनी ट्रंप ने कर दी।
किसी बड़ी रणनीतिक सफलता और दीर्घकालिक समझौते के अभाव में पूरे दौरे का ध्यान ठोस नतीजों से भटककर इन मजाकिया टिप्पणियों और सतही तमाशों पर ही केंद्रित रहा।
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